ईरान में हमले की फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
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खंडहर बने अस्पताल और स्कूल, ईरान में 85,000 नागरिक ठिकानों को पहुंचा भारी नुकसान; हजारों परिवारों का पलायन

Israel Iran War: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष ने ईरान में तबाही का मंजर पैदा कर दिया है। अब तक 1,500 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और देश की 3 प्रतिशत से ज्यादा आबादी विस्थापित हो चुकी है।

अमन उपाध्याय

Humanitarian Crisis Iran Israel War: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों से शुरू हुआ संघर्ष अब एक भयावह मानवीय संकट में तब्दील हो गया है। ईरान और लेबनान से आ रही रिपोर्टें दिल दहला देने वाली हैं जहां बमबारी और गोलाबारी ने न केवल सैन्य ठिकानों बल्कि आम नागरिकों के जीवन को भी पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है।

ईरान में मौतों का बढ़ता आंकड़ा

ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक 1,500 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है क्योंकि अभी तक पूरी गणना नहीं हो पाई है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) की रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को हमले शुरू होने के बाद से ईरान में 32 लाख लोग बेघर हो चुके हैं जो देश की कुल आबादी का 3 प्रतिशत से भी अधिक है।

बुनियादी ढांचे पर भीषण चोट

ईरान में अब तक 85,176 से अधिक नागरिक स्थलों को भारी नुकसान पहुंचा है। इसमें 282 स्वास्थ्य केंद्र, 600 स्कूल और 64,583 रिहायशी मकान शामिल हैं। अकेले राजधानी तेहरान में लगभग 14,000 घरों को नुकसान पहुंचा है जिसके बाद प्रशासन ने कम से कम 6,000 लोगों को म्युनिसिपल होटलों में शरण दी है। हमलों की चपेट में केवल घर ही नहीं बल्कि परमाणु संयंत्र, रिफाइनरी और खारे पानी को मीठा करने वाले प्लांट भी आए हैं जिससे बुनियादी सुविधाओं का संकट गहरा गया है।

शरणार्थी संकट की आहट

जंग के 27 दिनों के बाद अब ईरान के पड़ोसी देश एक बड़े शरणार्थी संकट के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। तुर्की, तुर्कमेनिस्तान और अजरबैजान ने सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ा दी है और विदेशी नागरिकों को निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि इराक की ओर जाने वाले लोगों की संख्या फिलहाल कम है फिर भी 325 ईरानी नागरिक सीमा पार कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में वहां पहुंच चुके हैं।

लेबनान में भी गहराता संकट

तबाही का यह मंजर केवल ईरान तक सीमित नहीं है। इजरायली सैन्य अभियान के कारण दक्षिणी लेबनान में भी हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हैं। नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल (NRC) के अनुसार, इजरायली सेना द्वारा जारी खाली करने के आदेशों ने लेबनान के 14 प्रतिशत हिस्से (लगभग 1,470 वर्ग किलोमीटर) को प्रभावित किया है जिससे वहां भी विस्थापन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

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