हूती विद्रोही, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

हूती नेता का अमेरिका पर तीखा हमला, सीजफायर इजरायल-वॉशिंगटन की नाकामी; ईरान के समर्थन में भरी हुंकार

Houthi Leader Abdul Malik: हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हौथी ने सीजफायर को अमेरिका-इजरायल की हार बताया है। उन्होंने वॉशिंगटन की मांगों को अहंकारी करार देते हुए ईरान के साथ खड़े रहने का ऐलान किया।

अमन उपाध्याय

Houthi Leader Abdul Malik US Israel: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही समूह के नेता अब्दुल मलिक अल-हौथी ने एक बड़ा और विवादित बयान जारी किया है। गुरुवार को एक वीडियो संबोधन के दौरान अल-हौथी ने मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति और विशेष रूप से अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे घटनाक्रमों पर अपनी राय रखी।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पिछले दो हफ्तों से जो संघर्षविराम चल रहा है वह शांति की किसी उदार मंशा का नहीं बल्कि अमेरिका और इजरायल की सैन्य एवं रणनीतिक विफलताओं का सीधा नतीजा है।

अमेरिका की 'असंभव' मांगों पर प्रहार

हूती नेता ने अमेरिका के बातचीत करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक चर्चाओं में वॉशिंगटन ऐसी शर्तें और मांगें सामने रख रहा है जिन्हें कोई भी स्वतंत्र, संप्रभु और सम्मानित राष्ट्र कभी स्वीकार नहीं कर सकता। अल-हौथी के अनुसार, अमेरिका का रवैया 'अहंकार और घमंड' पर आधारित है जो दूसरों की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय संप्रभुता को पूरी तरह से नजरअंदाज करता है। उन्होंने चेताया कि इस तरह का व्यवहार क्षेत्र में शांति लाने के बजाय तनाव को और अधिक भड़काने वाला है।

सीजफायर और क्षेत्रीय प्रतिरोध

वर्तमान में पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका-ईरान के बीच दो हफ्तों का सीजफायर चल रहा है। अल-हौथी ने इस सीजफायर को ईरान की एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक जीत के रूप में पेश किया है। उन्होंने कहा कि यदि ये बातचीत सफल होती है तो इसका परिणाम या तो क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता के रूप में निकलेगा या फिर बाहरी आक्रामकता का पूरी तरह अंत होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि हूती विद्रोही पूरी मजबूती के साथ ईरान और क्षेत्रीय प्रतिरोध के साथ खड़े हैं।

इजरायल की आक्रामकता हूतियों की तैयारी

इजरायल का जिक्र करते हुए हूती नेता ने कहा कि भले ही कागजों पर सीजफायर की बात हो रही है लेकिन इजरायल अभी भी कई क्षेत्रों में अपनी सैन्य कार्रवाई और हमले जारी रखे हुए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्य पूर्व में वास्तविक शांति तभी स्थापित हो सकती है जब इजरायल अपनी आक्रामकता को पूरी तरह से बंद कर दे। अल-हौथी ने अपने समूह की सैन्य तत्परता का संकेत देते हुए कहा कि यदि स्थिति बिगड़ती है और संघर्ष दोबारा शुरू होता है तो उनका समूह किसी भी बड़े और प्रभावी कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

कौन हैं हूती और क्या है उनकी भूमिका?

अपनी जड़ों को याद करते हुए अल-हौथी ने बताया कि हूती यमन के अल्पसंख्यक शिया 'जैदी' समुदाय का एक सशक्त सशस्त्र समूह है। 1990 के दशक में तत्कालीन राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए इस समूह का गठन हुसैन अल-हूती के नेतृत्व में किया गया था।

आज यह समूह न केवल यमन की राजनीति में एक बड़ी शक्ति है, बल्कि लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों पर भी अपना प्रभाव रखता है। अल-हौथी ने अंत में ईरान की प्रशंसा करते हुए कहा कि तेहरान की नीतियों ने पूरे क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार किया है।

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