बांग्लादेश में हिंदू व्यक्ति को जिंदा जलाने की कोशिश (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

'कट्टरपंथियों ने जिंदा जलाया, तालाब में कूदकर बची जान', बांग्लादेश में हिंदू हमले की खौफनाक कहानी

Bangladesh Hindu Violence: बांग्लादेश में हिंदू कारोबारी खोकोन दास पर हुए क्रूर हमले ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, बढ़ती हिंसा और सरकार की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए दुनियाभर में

अक्षय साहू

Bangladesh Burn Hindu Man: बांग्लादेश के शरियतपुर जिले में एक और हिंदू शख्स के साथ खौफनाक हमला हुआ है। पुलिस के मुताबिक, हमलावरों ने 50 वर्षीय कारोबारी खोकन चंद्र दास पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया है और पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है। बांग्लादेश में पिछले 12 दिन हिंदू समुदाय के खिलाफ चौथी घटना है।

पीड़ित हिंदू कारोबारी खोकोन चंद्र दास अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, तभी उन पर अचानक हमला हुआ। हमलावरों ने उन्हें धारदार हथियारों से काटा और फिर उनके सिर और चेहरे पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। सवाल उठता है कि क्यों एक निर्दोष व्यक्ति को इस तरह निशाना बनाया गया, जबकि उनका किसी से कोई विवाद नहीं था?

खोकोन चंद्र दास पर क्यों हुआ हमला?

खोकोन चंद्र दास की पत्नी सीमा दास का कहना है कि हमलावरों में से दो को उनके पति पहचानते थे। यह हमला क्या व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था, या फिर यह किसी और कारण से हुआ? सीमा का कहना है कि उनका परिवार सिर्फ शांति से जीने की कोशिश कर रहा था और उन्होंने किसी का नुकसान नहीं किया। हमलावरों ने खोकोन को गंभीर रूप से जख्मी करने के बाद उन्हें जलाने की कोशिश की, लेकिन खोकोन ने पास के तालाब में कूदकर अपनी जान बचाई। इसके बावजूद उनकी हालत गंभीर है, और उन्हें ढाका मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।

बांग्लादेश में हिंदूओं पर क्यों हो रहे हमले?

यह घटना ऐसे समय में घटी है, जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ रही है। हाल ही में, बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को लेकर भारत ने भी गंभीर चिंता जताई थी। लेकिन बांग्लादेश सरकार इन आरोपों से इनकार करती है और कहती है कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

गांव से एक मुस्लिम व्यक्ति ने इस हमले को सांप्रदायिक मामला नहीं बताया और दावा किया कि वह परिवार की हर संभव मदद कर रहा है। फिर भी, क्या इस हिंसा को सिर्फ एक व्यक्तिगत घटना माना जा सकता है, या यह एक बड़े पैटर्न का हिस्सा है?

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