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इटली के राजनीतिक विशेषज्ञ ने पाकिस्तान, तुर्की पर साधा निशाना
आतंकवाद का विरोध देश देखकर नहीं होना चाहिए
मक्का समझौते पर उठाया सवाल
Pakistan And Türkiye Silence Flydubai FZ1073 Attack: 30 सितंबर 2026 को फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में विमान के भीतर सह-पायलट द्वारा कप्तान पर हमला करने और विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कथित साजिश का मामले में रोज नया मोड़ सामने आ रहा है। इस घटना में भारतीय मूल के कैप्टन स्मित मच्छार ने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद विमान में सवार यात्रियों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अधिकारियों ने बाद में इसे कथित आतंकवादी हमले की साजिश बताया।
इस मामले में इटली के राजनीतिक सलाहकार, लेखक और भू-राजनीतिक विशेषज्ञ सर्जियो रेस्टेली ने पाकिस्तान और तुर्की पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हर हाल में सऊदी अरब की रक्षा करने के पाकिस्तान के वादे और सऊदी अरब पर किसी भी सशस्त्र हमले को खुद पर हमला मानने की तुर्की की प्रतिबद्धता के बावजूद, दोनों देशों ने फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 से जुड़ी घटना की सार्वजनिक रूप से निंदा नहीं की है।
इटली के राजनीतिक सलाहकार, लेखक और भू-राजनीतिक विशेषज्ञ सर्जियो रेस्टेली ने द टाइम्स ऑफ इजरायल में प्रकाशित अपने लेख में इस घटना को लेकर पाकिस्तान और तुर्की की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि कुछ परिस्थितियों में चुप्पी कूटनीति का हिस्सा होती है, लेकिन कई बार यही चुप्पी राजनीतिक संदेश बन जाती है।
भारतीय कैप्टन ने जान पर खेलकर बचाई 170 यात्रियों की जान
दुबई से तेल अवीव जा रहे इस विमान में 170 से अधिक यात्री सवार थे। कॉकपिट में सह-पायलट हम्माम अल-हम्मामी द्वारा कैप्टन स्मित मच्छार पर कथित हमले के बाद विमान गंभीर संकट में फंस गया। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के अनुसार, यात्रियों और क्रू के हस्तक्षेप से पहले विमान 30 सेकंड से भी कम समय में करीब 14,000 फीट नीचे गिर गया था। बाद में विमान सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया।
रेस्टेली ने इस घटना को क्षेत्रीय सहयोग और सामूहिक सुरक्षा के दावों की परीक्षा बताते हुए कहा कि इसकी संवेदनशीलता कई देशों के हितों से जुड़ी हुई है। विमान संयुक्त अरब अमीरात की एयरलाइन का था, उसका गंतव्य इजरायल था और उसमें कई इजरायली यात्री सवार थे। वहीं, उनके लेख के अनुसार, विमान को सुरक्षित उतारने के प्रयास में जुटे कैप्टन भारतीय थे और कथित हमलावर ओमान का नागरिक था।
पाकिस्तान और तुर्की की चुप्पी पर सवाल
रेस्टेली के अनुसार, इस घटना की सार्वजनिक निंदा नहीं होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच मक्का समझौते का उद्देश्य केवल क्षेत्रीय सहयोग का संदेश देना नहीं था। इस समझौते से सामूहिक सुरक्षा और साझा जिम्मेदारी की अपेक्षाएं जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी घटना की निंदा करना राजनीतिक रूप से सुविधाजनक होता है, तब सामूहिक सुरक्षा की प्रतिबद्धता जताना आसान होता है। लेकिन जब मामला कूटनीतिक रूप से संवेदनशील हो, तब सिद्धांतों पर कायम रहना अधिक कठिन हो जाता है।
आतंकवाद की निंदा राष्ट्रीयता देखकर नहीं होनी चाहिए
रेस्टेली का कहना है कि किसी नागरिक विमान पर हमले या उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश की निंदा करने का अर्थ इजरायल को मान्यता देना, नेतन्याहू का समर्थन करना या फिलिस्तीन के मुद्दे से पीछे हटना नहीं है। उनके मुताबिक, नागरिकों की सुरक्षा और हिंसा की निंदा को राजनीतिक मतभेदों से अलग रखा जाना चाहिए।
उन्होंने जोर दिया कि किसी भी गठबंधन की असली परीक्षा तब होती है, जब उसके सदस्यों के लिए साझा सिद्धांतों का समर्थन करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे समय में उनकी प्रतिक्रिया ही गठबंधन की विश्वसनीयता को सामने लाती है।
मक्का समझौते की नैतिक जिम्मेदारी का सवाल
रेस्टेली ने कहा कि सऊदी अरब की भूमिका केवल सुरक्षा गारंटी हासिल करने वाले देश तक सीमित नहीं है। दो पवित्र मस्जिदों का संरक्षक होने के नाते सऊदी अरब इस्लामी जगत में विशेष धार्मिक और राजनीतिक महत्व रखता है। ऐसे में मक्का के नाम से जुड़े किसी गठबंधन से सामान्य रक्षा सहयोग से आगे बढ़कर नैतिक जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा की जाती है।
उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि यदि मक्का समझौते का उद्देश्य सुरक्षा का एक गंभीर और प्रभावी ढांचा तैयार करना है, तो उसके सदस्य आतंकवाद और नागरिकों के खिलाफ हिंसा की निंदा करने में दोहरे मानदंड नहीं अपना सकते। किसी घटना पर प्रतिक्रिया विमान के गंतव्य, यात्रियों की राष्ट्रीयता या तत्कालीन कूटनीतिक परिस्थितियों के आधार पर तय नहीं होनी चाहिए।...एजेंसी इनपुट के साथ