पीएम मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)  
विदेश

क्या भारत बनेगा ‘पीस मेकर’? ईरान जंग के बीच पहली बार ट्रंप ने किया PM मोदी को फोन; जानें क्या हुई बात

Trump Modi Phone Call: ईरान युद्ध के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने पहली बार पीएम मोदी को फोन किया है। दोनों नेताओं ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने और वैश्विक तेल आपूर्ति सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई।

अमन उपाध्याय

Trump Modi Call On Iran War: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिली है। 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हुए हमलों के बाद पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की है। इस हाई-प्रोफाइल बातचीत की जानकारी भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर साझा चिंता

इस फोन कॉल का मुख्य केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज रहा। ट्रंप और मोदी दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए इस समुद्री मार्ग को खुला रखना अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान युद्ध के कारण इस मार्ग से होने वाला दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिसे इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने अब तक की सबसे बड़ी आपूर्ति बाधा बताया है।

भारत का कड़ा और स्पष्ट रुख

पीएम मोदी ने इस मुद्दे पर भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने सोमवार और मंगलवार को संसद के दोनों सदनों में दोहराया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी भी तरह का अवरोध या नागरिकों और कर्मशियल जहाजों पर हमला 'अस्वीकार्य' है। मोदी ने कहा कि भारत की प्राथमिकता यह है कि तनाव कम हो और जहाज सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।

शांति के लिए कूटनीतिक प्रयास

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह फोन कॉल ऐसे समय में किया है जब उन्होंने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को 5 दिनों के लिए रोक दिया है, ताकि बातचीत का रास्ता निकल सके। पीएम मोदी ने राज्यसभा में अपने संबोधन में बताया कि भारत लगातार ईरान-इजरायल और अमेरिका के संपर्क में है, ताकि शांति बहाल की जा सके। चूंकि युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है इसलिए भारत हर संभव स्रोत से तेल और गैस खरीदने की कोशिश कर रहा है।

वैश्विक सप्लाई चेन पर असर

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने का सीधा असर वैश्विक सप्लाई चेन और तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। भारत के लिए यह सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों का मामला है क्योंकि हाल ही में भारतीय टैंकरों को लेकर कई तरह की भ्रामक खबरें भी सामने आई थीं। इस बातचीत से स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन मध्य-पूर्व के संकट को हल करने में भारत की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण मानता है।

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