

Iran New Security Chief Zolghadr: पश्चिम एशिया में इजरायल के साथ जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान ने अपने सुरक्षा तंत्र को मजबूती देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मोहम्मद बागेर जुल्घदर को देश का नया सिक्योरिटी चीफ नियुक्त किया गया है। यह महत्वपूर्ण बदलाव अली लारीजानी की हाल ही में हुई मौत के बाद किया गया है। लारीजानी ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) के सचिव थे और उन्हें देश की रक्षा, परमाणु और विदेश नीति का मुख्य वास्तुकार माना जाता था।
ईरान के सुरक्षा तंत्र में यह हलचल 17 मार्च को हुई एक घटना के बाद शुरू हुई। तेहरान के बाहरी इलाके में एक इजरायली हवाई हमले में अली लारीजानी की मौत हो गई। इस हमले में उनके साथ उनके बेटे मोर्तेजा लारीजानी और उनके कार्यालय के प्रमुख अलिरेजा बयात भी शहीद हो गए। लारीजानी पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के अत्यंत करीबी सलाहकार थे और इस्लामी क्रांति के प्रति समर्पित नेता के रूप में उनकी एक अलग पहचान थी। उनकी शहादत को ईरान के लिए एक बड़ी रणनीतिक क्षति के रूप में देखा जा रहा है।
नवनियुक्त सिक्योरिटी चीफ मोहम्मद बागेर जुल्घदर का चयन ईरान के सैन्य और सुरक्षा तंत्र को और अधिक सख्त बनाने का संकेत है। जुल्घदर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व वरिष्ठ कमांडर रहे हैं और लंबे समय से देश के सुरक्षा ढांचे से जुड़े हुए हैं। वे आईआरजीसी में उप कमांडर इन चीफ और उप समन्वयक जैसी प्रमुख भूमिकाएं निभा चुके हैं। इसके अलावा, वर्ष 2005 से 2007 के दौरान उन्होंने आंतरिक मंत्रालय में सुरक्षा मामलों के उप मंत्री के रूप में भी कार्य किया है।
जुल्घदर की नियुक्ति एक ऐसे समय में हुई है जब ईरान को कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत और विदेशी खतरों का सामना करना पड़ रहा है। वे अपनी कट्टरपंथी विचारधारा के लिए जाने जाते हैं और विदेशी शक्तियों के खिलाफ बेहद सख्त रुख रखते हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जुल्घदर के नेतृत्व में ईरान की परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय नीतियों में एक नया और आक्रामक दृष्टिकोण देखने को मिल सकता है।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) देश की सबसे शक्तिशाली संस्था है जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सभी बड़े फैसले लेती है। जुल्घदर की पृष्ठभूमि सैन्य और खुफिया जानकारी में माहिर होने के कारण, ईरानी अधिकारियों को उम्मीद है कि उनकी नियुक्ति से देश की सुरक्षा और एकता बनी रहेगी। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, तेहरान का यह फैसला वैश्विक शक्तियों को एक स्पष्ट संदेश है कि वह अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।