Donald Trump Iran Threat Response: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस्लामिक गणराज्य ईरान को तबाह करने की धमकी पर ईरानी सेना ने कड़ा ऐतराज जताया है। ईरान के जनरल स्टाफ ने ट्रंप के इस आक्रामक बयान को अमेरिका की कमजोरी और रणनीतिक हताशा का स्पष्ट संकेत करार दिया है।
ईरानी सशस्त्र बलों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से कोई नया सैन्य हमला होता है तो उसका जवाब पहले से कहीं अधिक भयंकर होगा। संयुक्त राष्ट्र महासभा के अंतरराष्ट्रीय मंच से दी गई इस धमकी के बाद मध्य पूर्व में सैन्य तनाव और कूटनीतिक हलचल काफी तेज हो गई है।
22 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते और सैन्य कार्रवाई के बीच विकल्प की बात कही। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ ऐसा समझौता हो सकता है, जिससे वह फिर से आगे बढ़ सके, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने इस्लामिक रिपब्लिक को संहार (annihilate) करने की धमकी भी दी।
ट्रंप के बयान के बाद ईरानी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ ने प्रतिक्रिया जारी की। ईरानी पक्ष ने अमेरिकी राष्ट्रपति के लगातार दिए जा रहे बयानों को वास्तविक सैन्य ताकत का संकेत मानने से इनकार किया। बयान में कहा गया कि इस तरह की धमकियां अमेरिका की रणनीतिक स्थिति में मुश्किलों को दर्शाती हैं।
ईरानी जनरल स्टाफ के मुताबिक, ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल अपनी नीतियों और सैन्य कार्रवाई को सही ठहराने के लिए किया। ईरानी सेना ने इन टिप्पणियों को घरेलू राजनीतिक प्रचार से भी जोड़ा है। ये दावे ईरानी सैन्य नेतृत्व के बयान पर आधारित हैं।
ईरान के सशस्त्र बलों ने अमेरिका और इजरायल की ओर से किसी नए सैन्य हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। जनरल स्टाफ ने कहा कि ईरानी सेना पूरी तरह तैयार है और किसी संभावित हमले का जवाब पहले की तुलना में अधिक गंभीर और अप्रत्याशित तरीके से दिया जाएगा।
ईरानी सेना ने यह भी कहा कि अमेरिकी धमकियां क्षेत्र में शक्ति संतुलन को नहीं बदल सकतीं। बयान में वॉशिंगटन की पश्चिम एशिया में सैन्य मौजूदगी और नीतियों की आलोचना की गई। ईरानी पक्ष ने अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय हितों की रक्षा को प्राथमिकता बताया है।
इससे पहले 21 सितंबर को ईरान के सैन्य कमान ने भी दावा किया था कि अमेरिका दोबारा हमले की तैयारी कर सकता है और चेतावनी दी थी कि ऐसे किसी हमले की स्थिति में अमेरिकी ठिकानों और हितों को निशाना बनाया जा सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी के बावजूद कूटनीतिक संपर्क पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने ईरानी अधिकारियों के साथ करीब तीन घंटे बातचीत की। ट्रंप ने इस बैठक को “बहुत अच्छी” और उपयोगी बताया तथा आगे भी बातचीत होने का संकेत दिया।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी UNGA के दौरान कई देशों के प्रतिनिधियों के साथ संपर्क में हैं। वहीं ट्रंप ने कहा है कि समझौते की संभावना बनी हुई है, जबकि ईरान ने अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट रखा है।
इस तरह एक ओर दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव और तीखे बयान जारी हैं, वहीं दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान बातचीत के जरिए समाधान तलाशने के प्रयास भी चल रहे हैं।