

Abbas Araghchi France UNGA Statement: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फ्रांस के कड़े रुख पर गहरी आपत्ति जताई है। न्यूयॉर्क में फ्रांस के विदेश मंत्री जीन नोएल बारो से हुई उच्चस्तरीय मुलाकात के बाद उन्होंने पेरिस की नीतियों की सार्वजनिक रूप से तीखी आलोचना की।
ईरानी विदेश मंत्री ने फ्रांस पर मानवाधिकारों के संवेदनशील मुद्दे पर दोहरा मापदंड अपनाने और आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया। दूसरी ओर फ्रांस ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रास्ते और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर विशेष जोर दिया है।
अब्बास अराघची और जीन-नोएल बारो के बीच यह बैठक 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई। दोनों नेताओं ने ईरान-फ्रांस संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर चर्चा की।
बैठक के बाद ईरानी पक्ष की ओर से बताया गया कि अराघची ने ईरान के प्रति फ्रांस के कथित हस्तक्षेपकारी रुख पर आपत्ति जताई। उन्होंने तेहरान स्थित फ्रांसीसी दूतावास से ईरान के घरेलू कानूनों और नियमों का सम्मान करने की अपेक्षा भी जाहिर की।
अराघची ने कहा कि ईरान सभी देशों के साथ आपसी सम्मान और साझा हितों के आधार पर संबंध चाहता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अपने राष्ट्रीय हितों और उद्देश्यों की रक्षा के लिए ईरान दृढ़ता से कदम उठाएगा।
ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिका और इजरायल की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर फ्रांस के रुख की आलोचना की। उनके मुताबिक, पेरिस एक ओर मानवाधिकारों को लेकर चिंता जताता है, लेकिन दूसरी ओर ईरान में अमेरिकी और इजरायली सैन्य कार्रवाई में मारे गए लोगों को लेकर पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं देता।
अराघची ने विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की मौतों का उल्लेख करते हुए फ्रांस पर मानवाधिकारों के मामले में दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों के क्रियान्वयन में फ्रांस के सहयोग को लेकर भी आपत्ति जताई। ये आरोप ईरानी पक्ष के बयान के रूप में सामने आए हैं।
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने बैठक में ईरान से कूटनीति के रास्ते पर दोबारा जुड़ने का आह्वान किया। फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, पेरिस मौजूदा संघर्ष का कूटनीतिक समाधान तलाशने में योगदान देने को तैयार है। फ्रांस ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी चिंताओं का समाधान बातचीत के जरिए करने की बात भी कही।
बारो ने होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने को फ्रांस की प्राथमिकता बताया। फ्रांस के अनुसार, इस जलमार्ग में आवाजाही बाधित होना क्षेत्रीय स्थिरता के साथ वैश्विक ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के लिए भी गंभीर चिंता है। पेरिस ने अंतरराष्ट्रीय कानून, नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक में दोनों देशों के राजनयिक संबंधों से जुड़े मुद्दे भी उठे। फ्रांस ने तेहरान में अपने राजनयिक कर्मचारियों और परिसरों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया, जबकि ईरान ने अपने घरेलू कानूनों के सम्मान पर जोर दिया।
ऐसे समय में हुई यह मुलाकात महत्वपूर्ण है, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में शामिल हैं।