ताइवान ने चीन सीमा पर तैनात की अमेरिकी मिसाइलें (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

चीन की 'सर्वनाश' वाली चेतावनी: ताइवान ने सीमा पर तैनात की अमेरिकी मिसाइलें

Taiwan Missile Deployment: चीन ने ताइवान को 'सर्वनाश' की चेतावनी देकर कहा कि मिसाइलों की तैनाती युद्ध को बुलावा देगी। ताइवान ने पेंघू और डोंगयिन द्वीपों पर 300 किमी रेंज वाली मिसाइलें लगाई हैं।

प्रिया सिंह

US Taiwan Missile Defense Deal: ताइवान और चीन के बीच जारी विवाद अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है क्योंकि ताइवान ने अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका से मिली घातक मिसाइलों को तैनात करने का फैसला किया है। इस कदम से भड़के चीन ने ताइवान को सीधे तौर पर 'सर्वनाश' की चेतावनी दे डाली है और इसे अपनी संप्रभुता के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। ताइवान और चीन के बीच बढ़ते विवाद के तहत ताइवान अपनी सैन्य शक्ति को लगातार बढ़ा रहा है ताकि वह बीजिंग के किसी भी संभावित हमले का कड़ा जवाब दे सके। दोनों देशों के बीच बढ़ता यह सैन्य जमावड़ा आने वाले समय में एक बड़े वैश्विक संघर्ष की ओर इशारा कर रहा है।

मिसाइल तैनाती और चीन की धमकी

चीनी सेना के प्रवक्ता जियांग बिन ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा है कि ताइवान की आजादी की किसी भी कोशिश का नतीजा बेहद खतरनाक होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन की मुख्य भूमि पर हमला करने के लिए अमेरिकी सिस्टम का इस्तेमाल करना "बेतुका और ओवरकॉन्फिडेंट" विचार है। चीन ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध भड़कता है तो ताइवान का पूरी तरह से विनाश होना निश्चित है।

HIMARS और ATACMS की मारक क्षमता

ताइवान ने अमेरिका से 11.1 बिलियन डॉलर की मेगा डील के तहत 82 M142 HIMARS लॉन्चर और 420 ATACMS मिसाइलों का ऑर्डर दिया है। ये मिसाइलें 300 किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम हैं जो चीन के तटीय नौसैनिक ठिकानों को आसानी से अपना निशाना बना सकती हैं। पेंघू और डोंगयिन जैसे द्वीपों पर इनकी तैनाती से फुज्यान और झेजियांग प्रांतों के हवाई अड्डे भी ताइवान की जद में आ जाएंगे।

शूट-एंड-स्कूट रणनीति

HIMARS सिस्टम अपनी "शूट-एंड-स्कूट" तकनीक के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है जिसमें हमला करने के बाद लॉन्चर तुरंत अपनी जगह बदल लेता है। यह प्रणाली लॉकहीड मार्टिन द्वारा विकसित की गई है और इसमें 3 क्रू सदस्यों की जरूरत होती है जो इसे युद्ध के मैदान में काफी मोबाइल बनाते हैं। यूक्रेन युद्ध में भी इस सिस्टम ने रूसी रसद और कमांड पोस्ट को तबाह करके अपनी घातक शक्ति का लोहा मनवाया था।

दशकों पुराना विवाद

चीन और ताइवान के बीच यह संघर्ष साल 1949 से चला आ रहा है जब कम्युनिस्टों की जीत के बाद राष्ट्रवादी सरकार ताइवान भाग गई थी। चीन "वन चाइना पॉलिसी" के तहत ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग की धमकी देता रहता है। वहीं ताइवान खुद को एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश मानता है जिसकी अपनी अलग सरकार, सेना और स्थिर अर्थव्यवस्था है।

अमेरिकी भूमिका और वैश्विक चिंता

अमेरिका अपनी भू-राजनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लगातार ताइवान को हथियारों की आपूर्ति कर रहा है और उसकी रक्षा का वादा भी करता है। चीन का मानना है कि अमेरिका की यह दखलंदाजी क्षेत्र की शांति को भंग कर रही है और अलगाववादी ताकतों को बढ़ावा दे रही है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है और चीनी फाइटर जेट्स अक्सर ताइवान की सीमा में घुसपैठ कर रहे हैं।

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