चीन के साथ आए OIC देश, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

ट्रंप के 'जंगल कानून' के खिलाफ चीन का बड़ा दांव, 57 मुस्लिम देशों के साथ मिलकर अमेरिका को घेरा

China OIC: चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों को 'जंगल का कानून' बताते हुए OIC के साथ हाथ मिलाया है ताकि विकासशील देशों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।

अमन उपाध्याय

US China Tariff War: वैश्विक कूटनीति के पटल पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया भर के देशों पर टैरिफ लगाने और व्यापारिक प्रतिबंधों की रणनीति अपना रहे हैं, वहीं चीन इस स्थिति का फायदा उठाकर नए गठबंधन बनाने में जुट गया है।

ताजा घटनाक्रम में, चीन ने अब दुनिया के 57 मुस्लिम देशों के सबसे बड़े संगठन, इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक स्तर पर मजबूत करने का ऐलान किया है।

ट्रंप की नीतियों पर 'जंगल का कानून' का प्रहार

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने सोमवार को OIC के महासचिव हुसैन इब्राहिम ताहा के साथ एक महत्वपूर्ण बातचीत की। इस दौरान वांग यी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ट्रंप की नीतियां दुनिया को एक 'जंगल के कानून' की ओर धकेल रही हैं। वांग के अनुसार, अमेरिका अपनी मर्जी से किसी भी देश पर भारी टैरिफ लगा देता है प्रतिबंध लगाता है और दूसरे देशों को स्वतंत्र रूप से व्यापार करने से रोकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन दुनिया को इस अराजक स्थिति में लौटने से रोकने के लिए पूरी तरह तैयार है।

OIC और चीन की 'रणनीतिक साझेदारी'

वांग यी ने OIC को इस्लामी दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण अंतर-सरकारी संगठन बताया। उन्होंने शिनजियांग प्रांत से जुड़े मुद्दों और ताइवान के सवाल पर चीन का पक्ष लेने के लिए OIC देशों की सराहना की। चीन अब इन देशों के साथ मिलकर एक ऐसी सुरक्षा साझेदारी बनाना चाहता है, जहां 'हॉटस्पॉट' मुद्दों का राजनीतिक समाधान निकाला जा सके। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, सुपरपावर्स की 'बुलिंग' का विरोध करना अब समय की मांग है।

विकासशील देशों के अधिकारों की रक्षा

चीनी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि चीन इस्लामी और अन्य विकासशील देशों के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन ने न केवल चीन, बल्कि अपने करीबी सहयोगियों कनाडा और यूरोपीय देशों के साथ भी टैरिफ के मुद्दे पर तनाव बढ़ा रखा है। चीन इसी रार का फायदा उठाते हुए अपनी पकड़ मुस्लिम देशों के बाजार और उनकी राजनीति पर मजबूत कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन खुद को विकासशील देशों के मसीहा के रूप में पेश कर रहा है ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिकी प्रभुत्व को चुनौती दी जा सके। वांग यी के बयान से साफ है कि चीन अब चुपचाप बैठने के बजाय अमेरिका की व्यापारिक घेराबंदी का जवाब एक बड़े कूटनीतिक मोर्चे के जरिए देने की तैयारी कर चुका है।

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