संपादकीय: चीन के बेतुके दावे का प्रधानमंत्री खंडन करें

China India Pakistan mediation: चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने झूठ की पराकाष्ठा पार करते हुए दावा किया कि उनके देश ने भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता कर उनका सैन्य टकराव रूकवाया।
India- China Conflicts
चीन के बेतुके दावे का प्रधानमंत्री खंडन करें (सौ. डिजाइन फोटो)
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नवभारत डिजिटल डेस्क: बेशर्म और मक्कार चीन से और क्या उम्मीद की जा सकती थी ! उसके बेतुके दावे सुनकर गधे को भी बुखार आ जाए।चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने झूठ की पराकाष्ठा पार करते हुए दावा किया कि उनके देश ने भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता कर उनका सैन्य टकराव रूकवाया।इसी तरह का झूठा दावा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार कर चुके हैं।दुनिया जानती है कि जब ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के नूरखान जैसे एयर बेस तबाह कर दिए गए व आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूत कर दिया गया तो पाकिस्तान घुटनों पर आया।वहां के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स (डीजीएमओ) काशिफ अब्दुल्ला ने भारत के डीजीएमओ ले.जन.संजीव घई से निवेदन कर संघर्ष रोकने को कहा।

यह 2 देशों का आपसी समझौता था जिसमें न अमेरिका की भूमिका थी, न चीन की।चीन का टुच्चापन तो इस बात से जाहिर है कि उसने 3 दिन की लड़ाई में पाकिस्तान की मदद की और अपने लड़ाकू विमानों व ड्रोन का इसी बहाने परीक्षण कर अपनी औकात परख ली।चीन के विदेशमंत्री ने शेखी बघारते हुए झूठ की इंतेहा कर दी।उन्होंने कहा कि चीन ने म्यांमार, ईरान के परमाणु मुद्दे, पाकिस्तान-भारत के बीच तनाव, फिलिस्तीन और इजराइल के बीच मुद्दों और कंबोडिया व थाईलैंड के बीच हाल ही में हुए संघर्ष में मध्यस्थता की।चीन का काइयांपन और धूर्तता से हर कोई अवगत है।उस पर कोई भरोसा नहीं कर सकता।4 जुलाई 2025 को भारत के उपसेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत असल में चीन का सामना कर रहा था और उससे लड़ रहा था।चीन पूरी तरह निर्णायक रूप से पाकिस्तान के साथ खड़ा था।

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चीन का पाखंड भारत लगभग 7 दशकों से देखता आ रहा है।तिब्बत पर कब्जा करने के बाद चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री चाऊ एन.लाई ने भारत आकर पं.नेहरू के साथ शांति व सहयोग के पंचशील समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन इसके बाद 1962 में भारत पर हमला कर चीन ने भयंकर विश्वासघात किया था।इसी सदमे की वजह से नेहरू का निधन हो गया था।झूठे और बेबुनियाद दावे करके चीन यह दिखाना चाहता है कि वह एक महाशक्ति है और दुनिया को अपने इशारों पर नचा सकता है।भारत स्पष्ट कर चुका है कि संघर्ष को रूकवाने में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी।इसके बाद भी ट्रंप और चीन अपना बड़बोलापन दिखाकर जगहंसाई करवा रहे हैं।अब तो हद हो गई।

प्रधानमंत्री मोदी को ट्रंप और चीन दोनों के निराधार व काल्पनिक दावों का खंडन करना चाहिए।यह भारत की सार्वभौमिकता से जुड़ा प्रश्न है।भारत ने कभी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की।डिप्लोमेसी की ऐसी कौन सी मजबूरी है कि 140 करोड़ आबादी के महान लोकतंत्र के प्रधानमंत्री इन झूठों को बेनकाब नहीं कर रहे हैं?

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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