शेख हसीना के बाद अब ढाका के पूर्व पुलिस चीफ को मौत की सजा, छात्रों के कत्लेआम पर ट्रिब्यूनल ने सुनाई फांसी

Bangladesh के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और फायरिंग के आरोप में ढाका के पूर्व पुलिस कमिश्नर हबीबुर रहमान समेत 3 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई।
After Sheikh Hasina, now the former Dhaka police chief has been sentenced to death; a tribunal handed down the death penalty for the massacre of students.
मोहम्मद यूनुस और शेख हसीना, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Bangladesh News In Hindi: बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के वफादार अधिकारियों पर शिकंजा कसता जा रहा है। सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसले में बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने ढाका के पूर्व पुलिस कमिश्नर हबीबुर रहमान और दो अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई है। यह सजा जुलाई-अगस्त 2024 में हुए छात्र आंदोलन के हिंसक दमन और पुलिस फायरिंग के लिए दी गई है।

चंखरपुल गोलीकांड और 6 मौतें

ट्रिब्यूनल ने यह फैसला 5 अगस्त, 2024 को हुई एक विशेष घटना के संदर्भ में दिया है जिस दिन शेख हसीना की सरकार का पतन हुआ था। आरोप है कि उस दिन ढाका के चंखरपुल इलाके में पुलिस की अंधाधुंध फायरिंग में छह प्रदर्शनकारी मारे गए थे। इस मामले में कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से तीन को अब सर्वोच्च दंड दिया गया है।

इन अधिकारियों को मिली मौत की सजा

ट्रिब्यूनल ने जिन तीन पूर्व अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई है, उनके नाम हैं:

  • हबीबुर रहमान (पूर्व मेट्रोपॉलिटन पुलिस कमिश्नर, ढाका)
  • सुदीप कुमार चक्रवर्ती (पूर्व जॉइंट कमिश्नर)
  • शाह आलम मुहम्मद अख्तरुल इस्लाम (पूर्व एडिशनल डिप्टी कमिश्नर)

कोर्ट ने इन तीनों दोषियों की संपत्ति जब्त करने का भी आदेश दिया है। हालांकि, सजा सुनाए जाने के समय ये तीनों अधिकारी उपस्थित नहीं थे और बांग्लादेश सरकार ने इन्हें 'भगोड़ा' घोषित कर दिया है।

पूर्व असिस्टेंट कमिश्नर को जेल की सजा

इस सजा के अलावा, ट्रिब्यूनल ने पूर्व असिस्टेंट कमिश्नर मुहम्मद इमरुल को छह साल की जेल की सजा सुनाई है। वहीं, शाहबाग पुलिस स्टेशन के एक इंस्पेक्टर और तीन कांस्टेबलों, जो वर्तमान में पुलिस हिरासत में हैं उन्हें तीन-तीन साल की जेल की सजा दी गई है।

शेख हसीना और यूनुस सरकार का रुख

मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार छात्र आंदोलन के दौरान हुई मौतों के लिए शेख हसीना शासन को जिम्मेदार ठहरा रही है। गौरतलब है कि इसी ट्रिब्यूनल ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भी पहले ही मौत की सजा सुनाने का आदेश दिया है। 5 अगस्त को हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद हसीना ने इस्तीफा देकर भारत में शरण ली थी। बांग्लादेश सरकार का दावा है कि उस आंदोलन के दौरान लगभग 3,500 मौतें हुई थीं।

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