चीन-पाक और बांग्लादेश में खोला नया मोर्चा, फोटो (सो. सोशल मीडिया)  
विदेश

भारत को घेरने की बड़ी साजिश? चीन-पाक का ‘4-फ्रंट प्लान’ एक्टिव, साउथ एशिया में बढ़ा खतरा!

South Asia News In Hindi: चीन और पाकिस्तान अफगानिस्तान व बांग्लादेश में कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग बढ़ाकर दक्षिण एशिया में भारत के प्रभाव को सीमित करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

अमन उपाध्याय

China Pakistan Strategic Alliance: चीन और पाकिस्तान दक्षिण एशिया में अपने रणनीतिक प्रभाव को मजबूत करने के लिए अफगानिस्तान और बांग्लादेश के साथ कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बहुस्तरीय रणनीति का उद्देश्य क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को सीमित करना है।

बीजिंग और इस्लामाबाद ने संवाद तंत्रों के जरिये सहयोग बढ़ाने, आर्थिक परियोजनाओं के विस्तार और सुरक्षा समन्वय को मजबूत करने पर सहमति जताई है। चीन खासतौर पर अफगानिस्तान के मुद्दे पर स्वयं को एक मध्यस्थ और संवाद आयोजक (कन्वीनर) के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। वह अपने इस कदम को शून्य-योग भू-राजनीति के बजाय पुनर्निर्माण और आतंकवाद-रोधी सहयोग के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा

चीन-पाकिस्तान विदेश मंत्रियों के सातवें रणनीतिक संवाद के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों देश चीन-अफगानिस्तान-पाकिस्तान त्रिपक्षीय संवाद और चीन-बांग्लादेश-पाकिस्तान सहयोग तंत्र के माध्यम से ठोस परिणाम देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह वार्ता 3 से 5 जनवरी के बीच बीजिंग में हुई जिसमें चीन के विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार शामिल हुए। संयुक्त वक्तव्य में अफगानिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठनों को क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया गया। दोनों देशों ने काबुल से आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और सत्यापनीय कार्रवाई की मांग की और इस बात पर जोर दिया कि अफगान भूमि का इस्तेमाल किसी अन्य देश के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए न हो।

आतंकवादी संगठन की मौजूदगी से इनकार

हालांकि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने अपने क्षेत्र में किसी भी आतंकवादी संगठन की मौजूदगी से इनकार किया है और पाकिस्तान में होने वाले हमलों को इस्लामाबाद का आंतरिक मामला बताया है।

आर्थिक मोर्चे पर, चीन और पाकिस्तान ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के अपग्रेडेड वर्ज़न 2.0 को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है जो चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का प्रमुख हिस्सा है। दोनों देशों ने सीपीईसी में 'तीसरे पक्ष की भागीदारी' का भी स्वागत किया है बशर्ते वह उनकी तय शर्तों के अनुरूप हो।

बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का निवेश

सूत्रों के मुताबिक, सीपीईसी को अफगानिस्तान तक विस्तारित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो काबुल को भारत समर्थित परियोजनाओं के विकल्प के रूप में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का निवेश मिल सकता है।

हालांकि पाकिस्तान में बीआरआई परियोजनाओं को लेकर कर्ज के बढ़ते बोझ और परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता पर सवाल उठते रहे हैं लेकिन चीन और पाकिस्तान इन्हें विकास वित्त के रूप में पेश कर रहे हैं।

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