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2030 तक अमेरिका को पछाड़ देगा चीन, परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में बनेगा नया 'सुपरपावर'

China Nuclear Power Expansion:चीन ने एक साथ 50 परमाणु रिएक्टर बनाने की क्षमता हासिल कर ली है। रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग 2030 तक US को पछाड़कर दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा उत्पादक बनेगा।

अमन उपाध्याय

China Nuclear Power Expansion Energy Market: वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में अपनी धाक जमाने के लिए चीन ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसने दुनिया भर के विकसित देशों को चौंका दिया है। चीन के परमाणु प्राधिकरण की हालिया घोषणा के अनुसार, देश ने अब एक साथ 50 परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों के निर्माण और प्रबंधन की क्षमता विकसित कर ली है।

यह मील का पत्थर ऐसे समय में आया है जब चीन अपनी ऊर्जा सुरक्षा को पुख्ता करने और जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता को न्यूनतम करने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहा है।

परमाणु ऊर्जा में वैश्विक नेतृत्व का रोडमैप

चीन न्यूक्लियर एनर्जी एसोसिएशन (CNEA) द्वारा जारी एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, चीन की परमाणु तकनीक अब एक नए और उन्नत स्तर पर पहुंच गई है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि बीजिंग के पास अब दर्जनों न्यूक्लियर परियोजनाओं को एक साथ संचालित करने का पूर्ण रोडमैप तैयार है, जिसमें डिजाइनिंग से लेकर अंतिम निर्माण तक की प्रक्रियाएं शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की यह क्षमता कई विकसित देशों की तुलना में काफी आगे निकल चुकी है।

आंकड़ों में चीन का दबदबा

चीन की वर्तमान परमाणु क्षमता के आंकड़े उसकी महत्वाकांक्षाओं की गवाही देते हैं। सरकारी चैनल CCTV और CNEA की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की कुल स्थापित परमाणु ऊर्जा क्षमता 125 मिलियन किलोवाट (KW) तक पहुंच गई है जो इसे वैश्विक स्तर पर शीर्ष स्थान पर रखती है। वर्तमान में, चीन में 60 कमर्शियल न्यूक्लियर रिएक्टर सक्रिय रूप से बिजली उत्पादन कर रहे हैं, जबकि 36 रिएक्टर निर्माणाधीन हैं। दिलचस्प बात यह है कि वर्तमान में दुनिया भर में हो रहे कुल परमाणु निर्माण का आधे से भी अधिक हिस्सा अकेले चीन में हो रहा है। इसके अतिरिक्त, 16 नई यूनिटों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।

2030 तक अमेरिका को पीछे छोड़ने का लक्ष्य

बीजिंग का लक्ष्य केवल अपनी क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि इस क्षेत्र में दुनिया का निर्विवाद नेता बनना है। CNEA के अनुसार, चीन का लक्ष्य 2030 तक परमाणु ऊर्जा के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ना और दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक बनना है। 2040 तक देश की स्थापित क्षमता 200 गीगावाट (GW) तक पहुंचने का अनुमान है।

रणनीतिक और तकनीकी नवाचार

चीन का यह आक्रामक विस्तार केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है बल्कि यह भू-राजनीतिक अस्थिरता और कार्बन उत्सर्जन कम करने की उसकी वैश्विक प्रतिबद्धता का हिस्सा है। विशेष रूप से अमेरिका-ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने बीजिंग को जीवाश्म ईंधन के विकल्पों को तेजी से अपनाने के लिए प्रेरित किया है। तकनीकी मोर्चे पर, चीन तीसरी और चौथी पीढ़ी की परमाणु तकनीक, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) और उन्नत ईंधन चक्रों के विकास में तेजी से निवेश कर रहा है।

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