China Iran Relations BRICS Summit: दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट के दौरान चीन और ईरान के टॉप लीडर्स के बीच कथित दूरी ने दोनों देशों के रिलेशंस को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। MBN न्यूज वेबसाइट पर जर्नलिस्ट जिम स्नाइडर के एक आर्टिकल में चीन और ईरान की स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का एनालिसिस किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत में एक दिन से भी कम समय तक रुके और इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। हालांकि, ब्रिक्स समिट में मौजूद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ उनकी मुलाकात या बातचीत की कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई।
शी जिनपिंग की भारत यात्रा काफी शॉर्ट रही। इस दौरान उन्होंने ब्रिक्स कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने के साथ प्रधानमंत्री मोदी से बाइलेट्रल मीटिंग की। रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति ने सिक्योरिटी और गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों पर ग्लोबल साउथ का सपोर्ट जुटाने की कोशिश की।
वहीं, सम्मेलन में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की मौजूदगी के बावजूद दोनों लीडर्स के बीच पब्लिक बातचीत सामने नहीं आई। जर्नलिस्ट जिम स्नाइडर के आर्टिकल में इस घटनाक्रम को चीन और ईरान के बीच स्ट्रैटेजिक रिलेशंस की कॉम्प्लेक्सिटी के संदर्भ में देखा गया है।
हालांकि, केवल किसी सम्मेलन में पब्लिक मीटिंग की जानकारी सामने नहीं आने से दोनों देशों के रिलेशंस की पूरी स्थिति तय नहीं की जा सकती।
रिपोर्ट में MENA यानी मिडिल ईस्ट एंड नॉर्थ अफ्रीका क्षेत्र से जुड़े ग्रेट पावर्स इंडेक्स का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, क्षेत्र में ईरान को चीन के सबसे करीबी देशों में बताया गया है।
इसके बावजूद आर्टिकल में कहा गया है कि दोनों देशों के रिलेशंस आंकड़ों की तुलना में अधिक कॉम्प्लेक्स हैं। चीन ईरान का महत्वपूर्ण इकोनॉमिक पार्टनर है, लेकिन बीजिंग ने अपनी व्यापक मिडिल ईस्ट स्ट्रैटेजी को पूरी तरह तेहरान के साथ जोड़ने से परहेज किया है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चीन क्षेत्र में किसी एक देश के साथ पूरी तरह जुड़ने के बजाय अलग-अलग देशों के साथ बैलेंस्ड डिप्लोमैटिक रिलेशंस बनाए रखने की पॉलिसी पर जोर देता है।
चीन और ईरान के बीच रिलेशंस में इकोनॉमिक इंटरेस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन को ईरान से रियायती दरों पर क्रूड ऑयल मिलता है, जिससे उसकी एनर्जी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है।
वहीं, ईरान को चीन के साथ ऑयल ट्रेड से रेवेन्यू प्राप्त होता है और चीनी मार्केट तक पहुंच मिलती है। ईरान के लिए चीन सबसे महत्वपूर्ण ट्रेड पार्टनर्स में से एक है और वह बड़ी मात्रा में चीनी वस्तुओं का इंपोर्ट भी करता है।
हालांकि, दोनों इकोनॉमीज के साइज को देखते हुए यह इकोनॉमिक रिलेशन असमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के कुल ग्लोबल ट्रेड में ईरान की हिस्सेदारी एक प्रतिशत से भी कम है।
चीन और ईरान ने 2021 में 25 साल के व्यापक कोऑपरेशन एग्रीमेंट पर साइन किए थे। इसमें एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रेड और सिक्योरिटी सहित कई सेक्टर्स में कोऑपरेशन का फ्रेमवर्क शामिल था।
हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार एग्रीमेंट के बावजूद दोनों देशों के बीच रियल इन्वेस्टमेंट अपेक्षाकृत लिमिटेड रहा है। इससे यह सवाल उठता है कि पेपर पर मौजूद स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप और ग्राउंड लेवल इकोनॉमिक कोऑपरेशन के बीच कितना अंतर है।
दिल्ली ब्रिक्स समिट के घटनाक्रम और रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के आधार पर चीन-ईरान रिलेशंस में इकोनॉमिक कोऑपरेशन मजबूत होने के बावजूद स्ट्रैटेजिक और डिप्लोमैटिक लेवल पर कई कॉम्प्लेक्सिटीज बनी रहने की बात कही गई है।