चाड में पानी कि किल्लत से जुझते लोग, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

चाड में पानी के लिए 'नरसंहार', दो परिवारों की जंग में 42 लोगों की मौत; सूडान सीमा पर सेना तैनात

Chad Water Access Dispute: चाड के पूर्वी इलाके में पानी के अधिकार को लेकर भड़की हिंसा में कम से कम 42 लोगों की जान चली गई है। संसाधनों की कमी और सूडान के युद्ध ने इस मानवीय संकट को गंभीर बना दिया है।

अमन उपाध्याय

Chad Water Conflict News: मध्य अफ्रीकी देश चाड से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है जहां पानी जैसे बुनियादी संसाधन के लिए शुरू हुआ विवाद एक बड़े कत्लेआम में तब्दील हो गया। चाड के पूर्वी हिस्से में स्थित वादी फिरा प्रांत में पानी के अधिकार को लेकर दो परिवारों के बीच छिड़ी जंग में अब तक 42 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। यह घटना शनिवार को शुरू हुई थी और देखते ही देखते इसने प्रतिशोध की आग का रूप ले लिया, जिससे आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई।

दो परिवारों के बीच छिड़ा खूनी संघर्ष

उप प्रधानमंत्री लिमाने महामत ने सोमवार को सूडान सीमा के पास स्थित इगोटे गांव का दौरा किया जहां उन्होंने इस भीषण हिंसा में हुई मौतों की पुष्टि की। रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा की शुरुआत केवल पानी के स्रोत तक पहुंच को लेकर दो परिवारों के आपसी विवाद से हुई थी। लेकिन जल्द ही इसने हिंसक प्रतिशोध का रूप ले लिया और कई गांवों में फैल गई। इस झड़प में कम से कम 10 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज प्रांतीय स्वास्थ्य केंद्रों में चल रहा है।

सेना ने संभाली कमान

हिंसा की भयावहता को देखते हुए चाड की सेना को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा। सुरक्षा बलों की त्वरित कार्रवाई के बाद स्थिति को और बिगड़ने से रोका गया। उप प्रधानमंत्री महामत ने बताया कि सेना की मौजूदगी के बाद अब स्थिति 'नियंत्रण में' है। प्रशासन ने गांव में पारंपरिक मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू कर दी है और साथ ही इस आपराधिक कृत्य के लिए जिम्मेदारी तय करने के लिए न्यायिक कार्यवाही भी शुरू की गई है।

सूडान युद्ध और संसाधनों का बढ़ता दबाव

चाड में जमीन और पानी के लिए समुदायों के बीच संघर्ष कोई नई बात नहीं है लेकिन हाल के दिनों में इसकी तीव्रता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पड़ोसी देश सूडान में जारी युद्ध ने चाड के संसाधनों पर अत्यधिक दबाव डाल दिया है। पूर्वी प्रांतों में लाखों सूडानी शरणार्थियों ने शरण ली है, जिससे पहले से ही सीमित भोजन और पानी के स्रोतों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। चाड ने फरवरी में ही सूडान के साथ अपनी सीमा को 'अगली सूचना तक' बंद कर दिया था ताकि वहां का संघर्ष उनके क्षेत्र में न फैल सके।

पुरानी रंजिश और जलवायु संकट की मार

चाड में किसान और चरवाहों के बीच भूमि और पानी को लेकर हिंसक झड़पें अक्सर होती रहती हैं। पिछले साल भी दक्षिण-पश्चिम इलाके में ऐसी ही लड़ाई में दर्जनों लोग मारे गए थे और सैकड़ों घर तबाह हो गए थे। सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह पूर्वी सीमा क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी लेकिन बढ़ती जनसंख्या और घटते जल स्तर ने इस समस्या को एक स्थायी चुनौती बना दिया है।

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