चाबहार पोर्ट, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

चाबहार पोर्ट के लिए बजट 'शून्य': चीन की एंट्री का खतरा या कूटनीतिक दांव? एक्सपर्ट ब्रह्म चेलानी ने चेताया

Chabahar Port Budget: बजट 2026 में चाबहार बंदरगाह के लिए कोई फंड आवंटित न होने पर रणनीतिक विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी ने चिंता जताई है। उन्होंने इसे चीन के लिए रास्ते खोलने वाली रणनीतिक चूक बताया है।

अमन उपाध्याय

Chabahar Port Budget 2026 Allocation News In Hindi: भारत सरकार ने आम बजट 2026 में अपनी महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजना, चाबहार बंदरगाह के लिए किसी भी नए बजट का प्रावधान नहीं किया है। कई वर्षों में यह पहला मौका है जब इस परियोजना के लिए 'शून्य' आवंटन हुआ है। इस फैसले ने रक्षा और विदेश मामलों के गलियारों में बहस छेड़ दी है क्योंकि चाबहार भारत की 'कनेक्टिविटी रणनीति' का एक मुख्य स्तंभ माना जाता है।

क्या चीन को मिल सकती है एंट्री?

प्रसिद्ध सामरिक मामलों के जानकार ब्रह्म चेलानी ने इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि चाबहार के लिए फंडिंग खत्म करना एक 'खतरनाक' फैसला हो सकता है। उनका तर्क है कि यदि भारत इस महत्वपूर्ण बंदरगाह से अपनी पकड़ ढीली करता है या पीछे हटता है तो चीन इस खाली स्थान को भरने के लिए तैयार बैठा है।

चीन पहले से ही पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट में भारी निवेश कर रहा है जो CPEC का हिस्सा है। यदि भारत चाबहार से हाथ खींचता है, तो ईरान चीन जैसे मजबूत साझेदार की ओर रुख कर सकता है जो भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक हार होगी।

अमेरिकी पाबंदियों का दबाव

भारत का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने भारत पर दबाव बढ़ा दिया है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने भारत को 26 अप्रैल 2026 तक इस प्रोजेक्ट से अलग होने की चेतावनी दी है अन्यथा पाबंदियों का सामना करने के लिए तैयार रहने को कहा है। गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल सितंबर में भारत को दी गई चाबहार संबंधी पाबंदी छूट को भी बिना किसी स्पष्ट कारण के वापस ले लिया था।

क्या 120 मिलियन डॉलर का ट्रांसफर है असली वजह?

हालांकि, बजट में शून्य आवंटन का एक तकनीकी पहलू भी हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने चाबहार के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के विकास के लिए 120 मिलियन डॉलर की धनराशि पहले ही ट्रांसफर कर दी है।

विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह राशि पहले से मौजूद होने के कारण शायद इस साल नए बजट की जरूरत नहीं पड़ी। इसके बावजूद, चेलानी का मानना है कि बजट से पूरी तरह नाम हटाना कूटनीतिक रूप से गलत संकेत भेजता है खासकर तब जब यह नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (NSTC) की धुरी है और पाकिस्तान को बाईपास करने का एकमात्र रास्ता है।

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