British PM Keir Starmer Crisis: ब्रिटेन के वर्तमान प्रधानमंत्री Keir Starmer इन दिनों एक बहुत बड़े और गंभीर राजनयिक विवाद में पूरी तरह से घिर गए हैं। यह पूरा विवाद उनके बेहद करीबी राजनीतिक सलाहकार पीटर मैंडेलसन के एक पुराने और सनसनीखेज मामले से गहराई से जुड़ा हुआ है। Keir Starmer ने राजनीतिक अनुभव को देखते हुए दिसंबर 2024 में मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का अहम राजदूत नियुक्त किया था। लेकिन अब यही चौंकाने वाला फैसला प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के गले की सबसे बड़ी फांस और बहुत बड़ा संकट बन गया है।
पीटर मैंडेलसन को ब्रिटिश राजनीति में उनके प्रभाव के कारण अक्सर 'प्रिंस ऑफ डार्कनेस' के नाम से भी जाना जाता है। वह 72 साल के हैं और इससे पहले टोनी ब्लेयर और गॉर्डन ब्राउन की सरकार में अहम कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। प्रधानमंत्री Keir Starmer ने जब 5 जुलाई 2024 को पद संभाला तो मैंडेलसन धीरे-धीरे उनके बहुत करीबी और खास बन गए।
राजदूत बनने के बाद मैंडेलसन और कुख्यात अमेरिकी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के गहरे संबंधों का अचानक भंडाफोड़ हो गया। यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि इन दोनों विवादित लोगों के बीच पिछले करीब दो दशकों से बहुत ही घनिष्ठ संबंध थे। मैंडेलसन कई बार पेरिस और न्यूयॉर्क जैसी जगहों पर इस खतरनाक यौन अपराधी के खास मेहमान बनकर भी जा चुके थे।
एपस्टीन को साल 2008 में जब यौन अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया, उसके बाद भी मैंडेलसन लगातार उससे मिलते रहे थे। मैंडेलसन ने एपस्टीन के जेल से बाहर आने के बाद 23 फरवरी की अपनी गिरफ्तारी से पहले कई वित्तीय लेनदेन भी किए। इसके अलावा उन पर मंत्री रहते हुए एपस्टीन को देश की कई अति सीक्रेट जानकारियां देने का गंभीर आरोप भी लगा है।
सितंबर 2025 में बढ़ते दबाव के बाद पीटर मैंडेलसन को अमेरिका के राजदूत पद से तुरंत और सख्ती से बर्खास्त कर दिया गया था। यह भी सामने आया कि मैंडेलसन अमेरिका जाने से पहले अपनी आवश्यक सिक्योरिटी जांच में पूरी तरह से फेल हो गए थे। विदेश मंत्रालय की जांच एजेंसियों ने उनके एपस्टीन और अन्य विदेशी संपर्कों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा माना था।
मैंडेलसन विवाद के कारण अब प्रधानमंत्री Keir Starmer की साफ-सुथरी राजनीतिक छवि पर बहुत बड़ा और गहरा दाग लग गया है। विपक्ष और उनकी लेबर पार्टी के कुछ नेता उन पर लगातार संसद को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाकर इस्तीफा मांग रहे हैं। इस पूरे बवाल के बीच विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ऑली रॉबिन्स को तो अपना अहम पद छोड़ना भी पड़ गया है।