ब्रिक्स समिट 2025 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग शामिल नहीं होंगे 
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BRICS 2025 में नहीं दिखेंगे दो दिग्गज नेता, क्या डर या कूटनीति बनी दूरी की वजह?

ब्राजील ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पुतिन ICC के गिरफ्तारी वारंट के चलते नहीं जाएंगे, वीडियो लिंक से जुड़ेंगे। रूस की ओर से सर्गेई लावरोव और चीन की ओर से शी चिनफिंग भी अनुपस्थित रहेंगे।

सौरभ शर्मा

रियो डी जेनेरियो: ब्रिक्स समिट 2025 को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में होने जा रहे इस महत्वपूर्ण वैश्विक सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग शामिल नहीं होंगे। पुतिन अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के गिरफ्तारी वारंट के चलते व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाएंगे और वीडियो लिंक के जरिए हिस्सा लेंगे। वहीं, चीन की ओर से प्रधानमंत्री ली कियांग प्रतिनिधित्व करेंगे।

इस बार ब्रिक्स सम्मेलन में पुतिन की गैरमौजूदगी इसलिए और अहम है क्योंकि 12 वर्षों में यह पहली बार है जब वह इस मंच से दूर रहेंगे। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव सम्मेलन में भाग लेंगे। चीन की ओर से भी शी जिनपिंग की जगह प्रधानमंत्री ली कियांग मौजूद रहेंगे। दक्षिण चीन मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला रणनीतिक और कूटनीतिक कारणों से लिया गया है।

ICC वारंट बना पुतिन के लिए बाधा

रूसी राष्ट्रपति पुतिन पर 2023 में ICC ने यूक्रेन युद्ध के दौरान बच्चों को जबरन रूस ले जाने के आरोप में गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। हालांकि रूस ने इस वारंट को पूरी तरह अमान्य बताया है और ICC की वैधता को खारिज किया है। इसके बावजूद, यदि पुतिन ऐसे किसी देश की यात्रा करते हैं जिसने ICC की संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। ब्राजील इस संधि का हस्ताक्षरकर्ता है, और ब्राजील सरकार की स्पष्ट स्थिति नहीं होने के कारण रूस ने पुतिन की यात्रा को टाल दिया है।

कूटनीतिक संकेत और नए समीकरण

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की अनुपस्थिति को लेकर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। शी की जगह प्रधानमंत्री ली कियांग को भेजना चीन के लिए अपने वैश्विक संबंधों को नए सिरे से संतुलित करने का प्रयास भी हो सकता है।

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ब्रिक्स समूह में अब ब्राजील, रूस, भारत, चीन, और दक्षिण अफ्रीका के अलावा पांच नए देश मिस्त्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई भी शामिल हो चुके हैं। ऐसे में इस सम्मेलन से वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ने की पूरी संभावना है।

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