सरकार के गठन से पहले बांग्लादेश में तनाव (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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बांग्लादेश में सरकार बनने से पहले ही सियासी रार, शपथ ग्रहण में दिखा तनाव, जमात ने तारिक को दिया अल्टीमेटम

Bangladesh Political Crisis: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-ए-इस्लामी के सांसदों ने ‘संविधान सुधार परिषद’ की शपथ लेने में आरंभ में हिचकिचाहट दिखाई, लेकिन बाद में संसद और परिषद दोनों की शपथ ली।

अक्षय साहू

Tarique Rahman Oath Ceremony: बांग्लादेश में 18 महीने बाद लोकतंत्र बहाल होने वाला जा रहा है। हालिया चुनाव में विजयी हुई बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के प्रमुख तारिक रहमान आज प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले हैं। लेकिन इससे पहले बांग्लादेश सियासी रार शुरू हो गई है। जिसके केंद्र में अंतरिम सरकार द्वारा लाया गया ‘संविधान सुधार परिषद’ का नियम है।

दरअसल, हालिया चुनाव में विजयी हुई बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के ‘संविधान सुधार परिषद’ के सदस्य के रूप में शपथ लेने से इनकार करने के बाद, कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के नव निर्वाचित संसद सदस्यों ने भी मंगलवार को शपथ लेने से मना कर दिया। मुख्य निर्वाचन आयुक्त एएमएम नसीरुद्दीन ने संसद भवन में बीएनपी सांसदों को पद की शपथ दिलाई। इसके बाद जमात के सांसदों को शपथ लेना था। लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया।

जमात-बीएनपी में तकरार

स्थिति तब जटिल हो गई जब बीएनपी ने जनमत-संग्रह का समर्थन करने के लिए ‘संविधान सुधार परिषद’ के सदस्यों के रूप में दूसरी शपथ लेने से इनकार कर दिया। जमात के उपाध्यक्ष अब्दुल्ला मोहम्मद ताहिर ने कहा, ‘‘जब तक बीएनपी के सांसद नियमित संसद सदस्यों के साथ-साथ ‘संविधान सुधार परिषद’ के सदस्यों के रूप में शपथ नहीं लेते, हम संसद सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण नहीं करेंगे।’’ हालांकि बाद में जमात-ए-इस्लामी नेतृत्व वाले 11-पार्टी गठबंधन के नवनिर्वाचित सांसदों और स्वतंत्र सांसदों ने संसद सदस्य के रूप में शपथ ले ली। इसके बाद उन्होंने ‘संविधान सुधार परिषद’ के सदस्यों के रूप में दूसरी शपथ भी ग्रहण की।

जुलाई चार्टर से जुडा है संविधान सुधार परिषद

‘संविधान सुधार परिषद’ के सदस्यों के रूप में दूसरी शपथ लेने का संबंध तथाकथित ‘जुलाई चार्टर’ को लागू करने की प्रतिबद्धता से है, जिसमें संविधान में व्यापक संशोधन का प्रस्ताव रखा गया था। जनमत-संग्रह में 84 बिंदुओं वाला जटिल प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसमें निर्वाचन आयोग के अनुसार 60 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने ‘हां’ में मतदान किया।

बीएनपी की नीति-निर्धारण स्थायी समिति के सदस्य और नवनिर्वाचित सांसद सहालुद्दीन अहमद ने शपथ ग्रहण से पहले पार्टी सांसदों से कहा कि उन्हें संविधान सुधार परिषद के सदस्य के रूप में चुना नहीं गया है और परिषद से संबंधित कोई प्रावधान अभी तक संविधान में शामिल नहीं किया गया है। पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान की मौजूदगी में उन्होंने कहा, “हममें से कोई भी दूसरी शपथ नहीं लेगा।” 

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