गंगा (पद्मा) नदी (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

Farakka Treaty: फरक्का संधि पर अड़ा बांग्लादेश, भारत से संबंध सुधारने के लिए रखी नई शर्त

Renew Farakka Treaty: फरक्का संधि पर बांग्लादेश की सरकार ने भारत के सामने शर्त रखी है। उनका कहना है कि दिसंबर 2026 में खत्म हो रही इस पुरानी संधि को उनकी जरूरत के अनुसार नया किया जाए।

प्रिया सिंह

Farakka Treaty Renewal Bangladesh Demands: भारत और बांग्लादेश के बीच पानी का अहम मुद्दा एक बार फिर से गहराने लगा है। बांग्लादेश की सत्तारूढ़ बीएनपी सरकार ने साफ कर दिया है कि भारत के साथ रिश्ते अच्छे रखने के लिए गंगा जल समझौते को नया करना होगा। ग्रामीण विकास मंत्री मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने यह अहम बयान दिया है।

उनका कहना है कि यह 30 साल पुरानी फरक्का संधि दिसंबर 2026 में पूरी तरह खत्म हो रही है। इसलिए इसे बांग्लादेश की वर्तमान उम्मीदों और जरूरतों के मुताबिक फिर से बनाया जाना चाहिए। उन्होंने ढाका में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट संदेश भारत को दिया है।

पुरानी संधि को नई करने की मांग

बांग्लादेश का कहना है कि नई संधि पर जल्द बातचीत शुरू होनी चाहिए। जब तक नया समझौता नहीं होता, तब तक पुरानी संधि को जारी रखा जाए। मंत्री ने कहा कि भविष्य के समझौतों की कोई समय सीमा नहीं होनी चाहिए। भारत से बांग्लादेश में जाने के बाद गंगा को पद्मा नदी कहा जाता है। खेती, पीने के पानी और मछली पालन के लिए यह नदी वहां बेहद जरूरी है। फरक्का बैराज की वजह से सूखे मौसम में वहां पानी काफी कम हो जाता है।

पानी कम होने से बांग्लादेश के कई अहम इलाकों में खारापन बढ़ गया है। इस कारण वहां के किसानों की खेती को भारी नुकसान हो रहा है। इसके समाधान के लिए सरकार ने पद्मा नदी पर नया प्रोजेक्ट पास किया है। यह नया बैराज प्रोजेक्ट साल 2033 तक पूरी तरह से बनकर तैयार होने की उम्मीद है। ढाका का कहना है कि इसका मकसद फरक्का बैराज के बुरे प्रभाव को कम करना है। हालांकि कुछ जानकारों ने इसके कारण जलस्तर बढ़ने की बड़ी चेतावनी दी है।

तीस्ता जल समझौता

इससे पहले बीएनपी नेताओं ने तीस्ता जल समझौते पर भी कई बड़े सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि ममता सरकार के कारण तीस्ता समझौता अभी तक अटका है। बीजेपी की जीत के बाद उन्हें उम्मीद है कि यह वार्ता आगे बढ़ेगी। भारत की तरफ से इस अहम मुद्दे पर बहुत ही स्पष्ट और सीधा जवाब दिया गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जल विवादों के लिए द्विपक्षीय तंत्र मौजूद हैं। दोनों देश 54 साझा नदियों के मुद्दों पर नियमित रूप से बातचीत करते हैं।

बीएनपी सरकार ने अब गंगा जल समझौते को सीधे दोनों देशों के रिश्तों से जोड़ दिया है। ऐसे में आने वाले समय में पानी की राजनीति एक बहुत बड़ा मुद्दा बन सकती है। इससे भारत और बांग्लादेश के भविष्य के संबंधों पर बहुत गहरा असर पड़ सकता है।

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