Balochistan Attack Rocket Launcher Incident: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हिंसा की घटना सामने आई है। केच जिले के बुलेदा इलाके में अज्ञात हमलावरों ने घर पर रॉकेट लॉन्चर से हमला किया। रॉकेट हमले व गोलीबारी में महिला समेत दो नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गई।
हमले में दो लोग गंभीर घायल हुए तथा 12 वर्षीय बच्चे को अगवा कर लिया गया। मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान ने इस पर गहरी चिंता जताई है। संगठन ने अगवा बच्चे की सुरक्षित वापसी और नागरिकों की सुरक्षा की अपील की है।
केच के बुलेदा स्थित अलंदूर इलाके में एक मकान को निशाना बनाकर यह हमला किया गया। एचआरसीबी के अनुसार हमले में सरदार याह्या और आयशा नामक महिला की मौत हुई है। वहीं गोलीबारी की चपेट में आने से शायहक और शाहब नाम के दो नागरिक घायल हुए हैं।
हमलावरों ने घर की इमारत के साथ-साथ सामान और वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। भागते समय हथियारबंद हमलावर 12 वर्षीय बच्चे ब्रह्मदाग को अगवा कर ले गए। अपहरण के बाद से बच्चे के ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।
बच्चे के परिजनों ने उसकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। एचआरसीबी ने बच्चे को परिजनों के पास सुरक्षित लौटाने की मांग की है।
एचआरसीबी का कहना है कि केच में आम नागरिकों की सुरक्षा स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। महिला की हत्या और मासूम बच्चे के अपहरण ने मानवाधिकारों पर सवाल खड़े किए हैं।
घरों पर रॉकेट हमलों तथा अपहरण की घटनाओं पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। नागरिकों की रक्षा के लिए प्रशासन को कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। बलूच कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस तरह के हमलों से जनता में भारी भय व्याप्त है।
निर्दोष महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। प्रभावित परिवारों को सुरक्षा देने के साथ ही दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। क्षेत्र में शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं को ध्यान देना चाहिए।
इससे एक दिन पहले बलूच वुमेन फोरम (BWF) ने भी एक सनसनीखेज दावा किया था। BWF के अनुसार 25 वर्षीय हानी बलूच और उनकी बेटी आयशा को अगवा किया गया है। 27 सितंबर की रात घर से सुरक्षा बलों व डेथ स्क्वॉड पर जबरन उठाने का आरोप है।
घटना के बाद से मां-बेटी का सुराग नहीं मिला है और परिवार परेशान है। BWF ने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के तरीके अपनाए जा रहे हैं। संगठन का दावा है कि पीड़ित परिवारों को डराने और दबाव में बयान दिलाने की कोशिश होती है।
जबरन गुमशुदगी की हकीकत छिपाने के लिए सामान्य स्थिति का दावा किया जाता है। हालांकि इन आरोपों पर सरकार या सेना की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।