India Tough Stance On Kashmir Issue: पाकिस्तान के लिए साफ्ट कार्नर रखने वाले तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक बार फिर कश्मीर के मुद्दे् पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। जिसको लेकर भारत ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए आप्पति जताई है। भारत ने एर्दोआन की टिप्पणी को अनावश्यक और अनुचित ठहराया।
भारत ने आपत्ति जताते हुए साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और इसमें किसी बाहरी देश को दखल देने का अधिकार नहीं है। इस मामले को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ कहा है कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है।
राजधानी में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा, जिन टिप्पणियों का आप जिक्र कर रहे हैं, वे तुर्किए के राष्ट्रपति ने की थीं। भारत, तुर्किए के राष्ट्रपति द्वारा UNGA संबोधन के दौरान भारत के केंद्रशासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के बारे में की गई अनावश्यक टिप्पणियों को खारिज करता है। जैसा कि आप समझेंगे, यह मामला भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से जुड़ा है और इस मुद्दे पर किसी भी बाहरी पक्ष का कोई अधिकार नहीं है।
तुर्की के राष्ट्रपति ने अतीत में भी महासभा में यह मुद्दा उठाया है, जिस पर सरकार की तरफ इसी तरह की प्रतिक्रिया आई थी। पिछले साल, भारत ने एक बार फिर कश्मीर पर अपना रुख स्पष्ट किया था, जिसके तहत किसी तीसरे पक्ष की भूमिका या मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं है।
जायसवाल ने सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र में एर्दोगन द्वारा कश्मीर पर टिप्पणी करने के सवाल का जवाब देते हुए कहा था, कश्मीर पर हमारा बयान स्पष्ट है। पिछले कुछ वर्षों में कश्मीर पर हमारी स्थिति से हर कोई वाकिफ है।
विदेश मंत्रालय ने कहा था कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर और लद्दाख का पूरा क्षेत्र भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और 'राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रचार को कितनी भी बार दोहराने से यह वास्तविकता नहीं बदल सकती।'
विदेश मंत्रालय ने कहा था, भारत, जम्मू और कश्मीर पर ओआईसी संपर्क समूह की संयुक्त विज्ञप्ति में भारत के बारे में की गई अनावश्यक और तथ्यात्मक रूप से गलत टिप्पणियों को स्पष्ट रूप से खारिज करता है। OIC को भारत के लिए पूरी तरह से आंतरिक मामलों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। खबर एजेंसी इनपुट के साथ है।