आसिम मुनीर, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

भारत के खिलाफ पाक सेना का 'इन्फॉर्मेशन ऑपरेशन', आसिम मुनीर ने तैयार किया नैरेटिव जंग का मास्टर प्लान

Asim Munir Pakistan Narrative: ऑपरेशन सिंदूर में विफलता के बाद पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने भारत की वैश्विक छवि बिगाड़ने के लिए 'रणनीतिक संचार मास्टर प्लान' शुरू किया है।

अमन उपाध्याय

Asim Munir Pakistan Narrative War Against India: पिछले साल 'ऑपरेशन सिंदूर' में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विफलता का सामना करने के बाद, पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने भारत के खिलाफ एक नई और खतरनाक रणनीति अपनाई है। सूत्रों और हालिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सैन्य तंत्र अब पारंपरिक हथियारों के बजाय 'दिमाग की जंग' यानी नैरेटिव वॉर पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की प्रतिष्ठा को धूमिल करना और वैश्विक जनमत को प्रभावित करना है।

नैरेटिव वॉर का 'मास्टर प्लान' 2025

पाकिस्तानी सेना के नेतृत्व ने अपनी पूर्ववर्ती विफलता से सबक लेते हुए 'रणनीतिक संचार मास्टर प्लान 2025' की शुरुआत की है। इस योजना के तहत, पाकिस्तान ऐसे अंग्रेजी भाषी डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है जो अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को विश्वसनीय लगें और बड़ी ही चतुराई से पाकिस्तान समर्थक नैरेटिव, विशेषकर कश्मीर मुद्दे पर, आगे बढ़ा सकें। इससे पहले पाकिस्तान का प्रचार तंत्र मुख्य रूप से उर्दू केंद्रित था जो वैश्विक स्तर पर प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहा था। अब 'इंटर-सर्विसेज़ पब्लिक रिलेशंस' (ISPR) जैसे संगठनों के माध्यम से इस ग्लोबल चर्चा को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

थिंक टैंक या प्रोपेगेंडा के अड्डे?

इस योजना के क्रियान्वयन के लिए पाकिस्तान ने कई नए "रिसर्च संस्थान" और थिंक टैंक स्थापित किए हैं। उदाहरण के तौर पर, लाहौर की मिन्हाज यूनिवर्सिटी में 'हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड पॉलिसी स्टडीज' का गठन किया गया है। नाम से यह संस्थान अकादमिक और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर शोध का दावा करता है लेकिन रिपोर्टों के अनुसार, यहां काम करने वाले लोगों के तार सीधे तौर पर पाकिस्तानी सैन्य और रणनीतिक तंत्र से जुड़े हुए हैं। ये संस्थान अकादमिक रिसर्च की आड़ में भारत विरोधी प्रोपेगेंडा सामग्री तैयार करने का काम कर रहे हैं।

ग्लोबल मीडिया नेटवर्क का जाल

पाकिस्तान ने यूरोप-ब्रिटेन समेत दुनिया के कई हिस्सों में डिजिटल मीडिया चैनलों का एक नेटवर्क खड़ा किया है। इनमें कराची का AsiaOne News, मैनचेस्टर का DM News English और पेरिस स्थित FP92TV व Afrik1 TV जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। ये आउटलेट्स खुद को 'निष्पक्ष पत्रकारिता' करने वाले संस्थानों के रूप में पेश करते हैं लेकिन विशेषज्ञों का दावा है कि यह केवल एक मुखौटा है ताकि संपादकीय निष्पक्षता की छवि बनी रहे और सैन्य प्रोपेगेंडा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाया जा सके।

संकट और आर्थिक चुनौतियां

भले ही पाकिस्तान इस 'इन्फॉर्मेशन ऑपरेशन' पर भारी निवेश कर रहा है लेकिन उसे 'भरोसे के संकट' का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब पर्दे के पीछे सेना या सरकार की भूमिका स्पष्ट हो जाती है तो वैश्विक दर्शक ऐसी खबरों से दूरी बना लेते हैं। इसके अतिरिक्त, पाकिस्तान वर्तमान में भीषण आर्थिक तंगहाली और रोटी-पानी जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है ऐसे में भारत के खिलाफ इस तरह की महंगी 'नैरेटिव जंग' छेड़ने पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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