इमरान खान, आसिम मुनीर (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

जेल में मारा इमरान तो बन जाएंगे 'जिन्न'! एक्सपर्ट बोले- हाथ भी लगाया तो मुनीर की बर्बादी तय

Pakistan News: इमरान खान की जेल में मौत की अफवाहों से पाकिस्तान की राजनीति में तनाव बढ़ गया। सेना जानती है कि उन्हें नुकसान पहुँचाने से देश में भारी अस्थिरता और जनविरोध भड़क सकता है।

अक्षय साहू

Imran Khan Pakistan News: पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल में मौत की अफवाहें तेजी से फैल रही थीं। ये अफवाहें तब शुरू हुईं जब उनसे जेल में मिलने की अनुमति बंद हो गई। इसके बाद खान के परिवार और राजनीतिक पार्टी पीटीआई के नेताओं ने अडियाला जेल के बाहर प्रदर्शन किया और सेना पर आरोप लगाए। कई दिनों के बाद उनकी बहन ने उनसे मुलाकात की, जिससे मौत की खबरें फिलहाल रूकी हैं। लेकिन देश की सियासी हालत अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर इमरान खान को जेल के अंदर नुकसान पहुंचाने का रिस्क नहीं लेंगे। अगर इमरान की मौत होती है, तो यह ऐसा जिन्न (मुद्दा) बन जाएगा जिसे कंट्रोल करना सेना के लिए बहुत मुश्किल होगा। आसिम मुनीर को एहसास है कि खान को खत्म करना अपनी ही ताकत को नुकसान पहुंचाने जैसा होगा। खासकर सेना और सरकार ऐसे जोखिम में नहीं जाना चाहती।

इमरान की बढ़ती ताकत से सेना में डर

आसिम मुनीर को पता है कि पंजाब, पाकिस्तान का सबसे बड़ा और ताकतवर प्रांत, इमरान खान की राजनीतिक ताकत का मुख्य केंद्र है। इस इलाके से किसी बड़े नेता को नुकसान पहुंचाने का खतरा उठाना वे कतई नहीं चाहेंगे। पहले भी ऐसा हुआ है कि पंजाब के नेता नवाज शरीफ को 2019 में इलाज के लिए इंग्लैंड जाने की छूट दी गई थी, ताकि वे हिरासत में न मरे और बड़ी राजनीतिक हलचल न हो।

इमरान खान का राजनीतिक प्रभाव सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं है। वे खुद तो पश्तून हैं, लेकिन उनका जन्म और समर्थन लाहौर और खैबर पख्तूनख्वा दोनों जगह है। मई 2023 में जब उन्हें गिरफ्तार किया गया था तो पूरे पंजाब में अशांति फैल गई थी, जिसमें सेना स्थलों पर भी हमले हुए थे। पाकिस्तान में अब तक सेना का किसी राजनीतिक दल से टकराव नहीं हुआ, और वे इसे दोबारा नहीं दोहराना चाहते।

इमरान की हत्या से बिगड़ सकते हैं हालात

इमरान खान के जाने से पंजाब और पूरे देश में भारी राजनीतिक उथलपुथल हो सकती है, जो सेना के लिए संभालना कठिन होगा। खासकर तब जब पाकिस्तान की आर्थिक हालत खराब है। उनके पास एक बड़ा युवा और डिजिटल समर्थन मौजूद है, जो उन्हें सिर्फ नेता नहीं बल्कि विरोध का प्रतीक मानता है। उनके मरने पर उनका प्रभाव खत्म नहीं होगा, बल्कि और फैल जाएगा।

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