Houthi Rebels Used Claude AI To Develop Missile Software: अमेरिकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी एंथ्रोपिक की एक नई रिपोर्ट में AI के गलत इस्तेमाल से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, यमन में एक्टिव हूती विद्रोहियों के एक हथियार इंजीनियरिंग सेल ने Claude AI का इस्तेमाल मिसाइल और गाइडेड रॉकेट के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने में करने की कोशिश की।
इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल गाइडेंस, नेविगेशन और कंट्रोल सिस्टम के लिए किया जा रहा था। एंथ्रोपिक ने संदिग्ध गतिविधि का पता लगाकर संबंधित अकाउंट्स पर प्रतिबंध लगा दिया और इसकी जानकारी थ्रेट इंटेलिजेंस से जुड़ी एजेंसियों के साथ शेयर की।
एंथ्रोपिक ने अपनी 154 पेजों की रिपोर्ट "Detecting and Countering Misuse of AI: September 2026" में AI के दुरुपयोग से जुड़े कई मामलों का खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यमन स्थित एक हथियार इंजीनियरिंग सेल ने कंपनी के एडवांस्ड AI मॉडल Claude Code का इस्तेमाल करने का प्रयास किया।
इस सेल ने AI को एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की तरह इस्तेमाल करते हुए हथियार प्रणालियों के लिए जरूरी कोड और तकनीकी जानकारी हासिल करने की कोशिश की। रिपोर्ट में इस नेटवर्क को पारंपरिक हथियारों के विकास, खुफिया जानकारी जुटाने और सैन्य खरीद से जुड़ी गतिविधियों से जोड़ा गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, यमन का यह हथियार सेल तीन प्रमुख मिसाइल कार्यक्रमों पर काम कर रहा था। इनमें एक गाइडेड रॉकेट, 2000 किलोमीटर से अधिक रेंज वाली मल्टी-स्टेज बैलिस्टिक मिसाइल और R2000 नामक मिसाइल सिस्टम शामिल था।
R2000 कार्यक्रम के तहत हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल के एक विशेष वेरिएंट को विकसित करने की कोशिश की जा रही थी। AI की मदद से गाइडेंस, नेविगेशन एंड कंट्रोल यानी GNC सॉफ्टवेयर तैयार कराया गया, जो उड़ान के दौरान मिसाइल की दिशा और स्थिरता नियंत्रित करने में भूमिका निभाता है।
एंथ्रोपिक के मुताबिक, संबंधित ग्रुप ने अपने वास्तविक उद्देश्य को छिपाकर AI की सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देने की कोशिश की। इसके लिए अलग-अलग सेशन का इस्तेमाल किया गया। एक सेशन में कोडिंग, दूसरे में रिसर्च और तीसरे में तैयार किए गए कोड की चेकिंग कराई गई।
ग्रुप ने व्यावसायिक रूप से उपलब्ध फोन-क्लास फ्लाइट कंप्यूटर को ओपन-सोर्स ऑटोपायलट से जोड़ने के लिए भी AI की सहायता ली। रिपोर्ट के अनुसार, एक गाइडेड रॉकेट का वास्तविक फील्ड टेस्ट किया गया, लेकिन परीक्षण असफल रहा। इसके बाद ग्रुप ने AI की मदद से विफलता के कारणों को समझने की कोशिश की।
एंथ्रोपिक की रिपोर्ट में यमन के अलावा चीन और रूस से जुड़े पांच अन्य हथियार अभियानों का भी उल्लेख है। इनमें एंटी-टॉरपीडो सिस्टम, ड्रोन स्वॉर्म, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और एयर डिफेंस सप्रेशन सॉफ्टवेयर विकसित करने की कोशिशों से जुड़े मामले शामिल हैं।
रिपोर्ट में बर्ड फ्लू और चिकनगुनिया जैसे वायरस से जुड़े जैविक शोध को लेकर भी चिंता जताई गई है। एंथ्रोपिक ने कहा कि जांच के बाद संबंधित अकाउंट्स पर रोक लगाई गई और थ्रेट इंटेलिजेंस को सार्वजनिक तथा निजी सुरक्षा एजेंसियों के साथ शेयर किया गया। ये निष्कर्ष AI तकनीक के सैन्य और जैविक दुरुपयोग को लेकर बढ़ती सुरक्षा चिंताओं को सामने रखते हैं।