Ali Nikzad Iran Warning US Statement: मिडिल ईस्ट में जारी भारी तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर कड़ा कूटनीतिक रुख अख्तियार किया है। ईरानी संसद के प्रथम उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) अली निकजाद ने अमेरिका को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि तेहरान किसी भी तरह की 'ब्लैकमेलिंग' की सियासत में विश्वास नहीं करता है। समाचार एजेंसी IRNA को दिए एक विशेष साक्षात्कार में निकजाद ने चेतावनी दी कि यदि वाशिंगटन वार्ता को दबाव बनाने के नजरिए से देख रहा है तो उसे अपनी विफलता मान लेनी चाहिए।
अली निकजाद ने वार्ता के दौरान अमेरिका द्वारा रखी जा रही 'अत्यधिक मांगों' की कड़ी आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान 'अधिकार की कूटनीति' (Diplomacy of Dignity) और अपनी गरिमा के साथ राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना जानता है। निकजाद के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय संबंधों में स्थिरता और अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करना ही आपसी भरोसे की बहाली का एकमात्र रास्ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और मौलिक सिद्धांतों के साथ किसी भी सूरत में समझौता नहीं करेगा।
साक्षात्कार के दौरान निकजाद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें एक 'अविश्वसनीय शख्सियत' करार दिया। उन्होंने ट्रंप के पिछले फैसलों को 'विश्वासघात' बताते हुए कहा कि ट्रंप की नीतियों में निरंतरता का अभाव और उनका अप्रत्याशित व्यवहार शांति वार्ता की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। ईरान का मानना है कि जब तक वाशिंगटन अपनी विश्वसनीयता को साबित नहीं करता, तब तक किसी भी ठोस नतीजे पर पहुंचना लगभग नामुमकिन है।
Strait of Hormuz का जिक्र करते हुए निकजाद ने इसे ईरान की 'रणनीतिक ताकत' बताया। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी दी कि 'प्रेशर-बेस्ड' (दबाव आधारित) बातचीत का मॉडल ईरान पर काम नहीं करेगा। गौरतलब है कि हाल ही में ईरानी नाकाबंदी के कारण अमेरिका को अपने 27 जहाजों को वापस लौटाना पड़ा था, वहीं अमेरिका ने ईरानी जहाज 'Touska' को अपने कब्जे में लिया है जिससे तनाव और बढ़ गया है। निकजाद ने संकेत दिया कि ईरान इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपनी स्थिति को लेकर किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे नहीं झुकेगा।
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निकजाद ने भविष्य की किसी भी बातचीत की सफलता को अमेरिका के व्यवहार से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि वार्ता को पटरी से उतरने से बचाने के लिए किसी भी पक्ष को अचानक और अस्थिर व्यवहार से बचना चाहिए। आखिर में, ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय स्वाभिमान की कीमत पर कोई डील नहीं करेगा और भविष्य की राह पूरी तरह से अमेरिका द्वारा ईरानी संप्रभुता के सम्मान पर टिकी है।