

Japan Lifts Arms Export Ban New Policy: वैश्विक रक्षा बाजार में एक बहुत बड़ी हलचल मचने वाली है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से शांति की राह पर चल रहे जापान ने अपनी रक्षा नीति में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव किया है। जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची की कैबिनेट ने करीब 50 साल पुराने उस प्रतिबंध को हटा दिया है जिसने जापान को घातक हथियारों के निर्यात से रोक रखा था। अब जापान अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने अत्याधुनिक फाइटर जेट, मिसाइलें और जंगी जहाज बेचने के लिए पूरी तरह तैयार है।
जापान का यह कदम बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य का नतीजा है। प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने इस बदलाव की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि आज के गंभीर सुरक्षा माहौल में कोई भी देश अब अकेले अपनी शांति और सुरक्षा की रक्षा नहीं कर सकता। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान के संविधान और कड़े नियमों ने उसे आक्रामक सैन्य क्षमताओं और उनके व्यापार से दूर रखा था लेकिन अब क्षेत्रीय तनावों और बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए जापान ने अपनी रक्षा क्षमताओं के व्यवसायीकरण का फैसला किया है।
जापान अब तक केवल गैर-घातक (Non-lethal) सैन्य उपकरण जैसे निगरानी उपकरण और माइन-स्वीपिंग गियर ही निर्यात करने तक सीमित था। हालांकि, नए नियमों के तहत अब वह फाइटर जेट, मिसाइल और जंगी जहाजों का भी निर्यात करेगा। जापानी अखबारों के अनुसार, जापान ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के लिए जंगी जहाज बनाने पर अपनी सहमति भी जता दी है। जापानी तकनीक अपनी सटीकता और गुणवत्ता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, ऐसे में वैश्विक हथियार बाजार में पहले से मौजूद अमेरिका, रूस और चीन जैसे दिग्गजों को जापान से कड़ी टक्कर मिल सकती है।
जापान ने स्पष्ट किया है कि वह अंधाधुंध हथियारों की बिक्री नहीं करेगा। प्रधानमंत्री ताकाइची के अनुसार, रक्षा उपकरणों का हस्तांतरण केवल उन देशों को किया जाएगा जो संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर के सिद्धांतों के अनुसार इनका इस्तेमाल करने का वादा करते हैं। जापानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्तमान में लगभग 17 देश जापान से हथियार खरीदने की पात्रता रखते हैं। यदि अन्य देश जापान के साथ द्विपक्षीय रक्षा समझौते करते हैं, तो भविष्य में यह सूची और भी बढ़ सकती है।
जापान में हथियारों के निर्यात पर कड़े नियम 1967 में लाए गए थे और 1976 में इन्हें पूरी तरह सख्त कर दिया गया था। पिछले पांच दशकों में जापान की भूमिका वैश्विक स्तर पर केवल शांति अभियानों तक सीमित थी। अब इस प्रतिबंध के हटने से न केवल जापान की अर्थव्यवस्था को एक नया आयाम मिलेगा बल्कि वह वैश्विक रक्षा कूटनीति में एक निर्णायक शक्ति बनकर उभरेगा।