सुवेंदु अधिकारी (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया) 
पश्चिम बंगाल

सीएम सुवेंदु का बड़ा एक्शन, दीदी की सरकार में बने जाति प्रमाण पत्रों की होगी जांच, 1.69 करोड़ लोग रडार पर

Suvendu Adhikari Caste Certificate Order: सरकार द्वारा पिछले कुछ वर्षों से इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर उठ रहे सवालों और लगातार मिल रही शिकायतों के मद्देनजर उठाया गया है।

अमन मौर्या

West Bengal Caste Certificate Verification: पश्चिम बंगाल की नई नवेली बीजेपी सरकार ने सत्ता में आते ही राज्य में कई बड़े कदम उठाए हैं। इसमें सेना के लिए जमीन देना, पशु वध के लिए नया नियम लाना, सड़क पर धार्मिक काम न करने जैसे कदम शामिल हैं। इस बीच सीएम सुवेंदु अधिकारी ने सभी जिलाधिकारियों को एक नया निर्देश जारी किया है। नए निर्देश के अनुसार, पूर्व की ममता सरकार के कार्यकाल यानी साल 2011 से अब तक राज्य में जारी किए गए सभी 1.69 करोड़ अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्रों को दोबारा सत्यापन किया जाएगा।

सरकार द्वारा यह कदम पिछले कुछ वर्षों से इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर उठ रहे सवालों के मद्देनजर उठाया गया है। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के सचिव ने गुरुवार को एक आधिकारिक आदेश जारी किया। आदेश में कहा गया है कि साल 2011 से अब तक करीब 1.69 करोड़ जाति प्रमाणपत्र राज्य में जारी किया गया है। 2011 से जारी सभी प्रमाणपत्रों को फिर से सत्यापन की सलाह दें।

सरकार के निर्देश पर जारी हुआ था प्रमाणपत्र

पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, द्वारे सरकार शिविर में प्राप्त आवेदनों के आधार पर राज्य में करीब 47.8 लाख जाति प्रमाणपत्र जारी किया गया था। अधिकारियों के मुताबिक राज्य की तत्कालीन टीएमसी सरकार के शीर्ष नेतृत्व द्वारा सभी एसडीओ कार्यालयों को द्वारे सरकार के आवेदनों को शीघ्र ही निपटाने का दबाव बनाया गया था। इस वजह से प्रमाणपत्रों को बिना वैध जांच और सत्यापन के ही जारी कर दिया गया था।

सरकार ने नहीं की ठोस कार्रवाई

परिणास्वरूप राज्य में कई अपात्र लोगों को भी प्रमाणपत्र मिल गया। समस्या तब और बढ़ गई जब प्रशासन द्वारा इन अपात्र लोगों को मिले प्रमाणपत्रों के आधार पर ही अगली पीढ़ी को भी जाति प्रमाणपत्र जारी करना शुरू कर दिया। इससे पश्चिम बंगाल में एससी, एसटी और ओबीसी आबादी में डर बैठ गया। कि वे सरकारी नौकरियों और अन्य योजनाओं में आरक्षण के लाभ से वंचित हो जाएंगे। इसके खिलाफ एसडीओ कार्यालयों में कई शिकायतें भी की गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

जनाधार पाना था उद्देश्य

राज्य के सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पिछले कई वर्षों से लगातार इस संबंध में शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों में राज्य की तत्कालीन टीएमसी सरकार ने उचित वेरिफिकेशन किए बिना ही अपात्र लोगों को भी जाति प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया था। एक अधिकारी ने बताया कि जाति प्रमाणपत्र जारी करने का यह सिलसिला पिछले विधानसभा चुनावों के ठीक पहले शुरू हुआ था।

इसका उद्देश्य राज्य में टीएमसी का जंगलमहल क्षेत्र में खोया हुआ जनाधार को वापस पाना था। बता दें, साल 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी राज्य में टीएमसी को कड़ी टक्कर दी थी। बीजेपी ने राज्य में कई लोकसभा सीटें जीती थीं। उसका वोट प्रतिशत में भी अप्रत्याशित वृद्धि हुई थी।

Vande Mataram Row: सोनिया गांधी की बढ़ीं मुश्किलें! BJP नेता ने दर्ज कराई शिकायत, हाईकोर्ट जाने की दी चेतावनी

तिरंगे का सफर: एक झंडा, 120 साल की कहानी, 1906 से 1947 तक ऐसे बदला भारत का राष्ट्रीय ध्वज...

आज की ताजा खबर 16 अगस्त LIVE: वाराणसी एयरपोर्ट पर चली गोलियां; बंगाल में आशीष बनर्जी ने की आत्महत्या

NEET Paper Leak Student Protest: राहुल गांधी बोले- युवाओं का साहस काबिल-ए-तारीफ, सत्ता से जवाब मांगना उनका हक

भूख हड़ताल पर बैठे पप्पू यादव, 70वीं BPSC परीक्षा रद्द करने की मांग पर अड़े सांसद, बिहार बंद की दी चेतावनी