'जिसे जाना है जाए, मैं अकेले TMC को खड़ी कर लूंगी', कालीघाट बैठक में ममता का बागी नेताओं को दो-टूक

TMC Review Meeting: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी उम्मीदवारों के साथ पहली बड़ी समीक्षा बैठक की। इस मीटिंग में ममता भड़की हुई नजर आईं।
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टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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TMC Kalighat Meeting: कालीघाट की इस बैठक में ममता बनर्जी ने साफ किया कि वे किसी को पार्टी में जबरदस्ती नहीं रोकेंगी और संगठन को शून्य से दोबारा खड़ा करने का साहस रखती हैं।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने और सालों बाद सबसे बड़े चुनावी झटके का सामना करने के बाद टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी अब संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कवायद में जुट गई हैं। कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने आवास पर उन्होंने चुनाव लड़ने वाले सभी पार्टी उम्मीदवारों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की, जिसमें राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी मौजूद रहे।

'जिन्हें जाना है जाएं, मैं जबरदस्ती नहीं रोकूंगी'

मीटिंद के दौरान ममता बनर्जी ने नेताओं के पाला बदलने की खबरों और पार्टी में मचे आंतरिक घमासान पर बेबाकी से बात की। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, "जो लोग दूसरी पार्टियों में जा रहे हैं, उन्हें जाने दें। मैं पार्टी को फिर से खड़ा करूंगी"। उन्होंने नेताओं से कहा कि वे किसी को भी जबरदस्ती रोककर रखने में विश्वास नहीं रखतीं और यदि लोग जाना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं। ममता ने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि जो लोग उनके साथ रुक रहे हैं, वे क्षतिग्रस्त हो चुके पार्टी दफ्तरों को फिर से ठीक करें और उन्हें दोबारा खोलें।

जनादेश 'लूटने' का आरोप

ममता बनर्जी ने बैठक में चुनाव नतीजों पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाया कि "जनता के जनादेश को लूटा और चुराया गया है"। बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी का किला पूरी तरह ढह गया है और पार्टी 294 में से महज 80 सीटों पर सिमट कर रह गई। चुनाव लड़ने वाले 291 उम्मीदवारों में से 211 उम्मीदवार अपनी सीट हार गए, जिनमें ममता सरकार के कई दिग्गज मंत्री शामिल हैं। सबसे बड़ा झटका खुद ममता बनर्जी को लगा, जो अपने गढ़ भवानीपुर सीट से चुनाव हार गईं। टीएमसी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर भी पोस्ट कर कहा गया कि पार्टी के उम्मीदवारों ने धमकियों और अत्याचारों के बावजूद बेजोड़ साहस के साथ चुनाव लड़ा। पार्टी ने संदेश दिया कि वे एक परिवार की तरह एकजुट खड़े हैं और जनादेश लूटने वालों के आगे कभी नहीं झुकेंगे।

बढ़ती कानूनी मुश्किलें बन रहीं गले की फांस

एक तरफ जहां संगठन संकट में है, वहीं पार्टी नेताओं की कानूनी मुश्किलें भी कम नहीं हो रही हैं। हाल ही में ममता बनर्जी के करीबी पुलिस अफसर शांतनु सिन्हा बिस्वास को वसूली और जमीन हड़पने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

इसके अलावा, अभिषेक बनर्जी पर भी गृह मंत्री अमित शाह को कथित तौर पर धमकी देने के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। ऐसे माहौल में ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे संघर्ष से पीछे हटने वाली नहीं हैं और टीएमसी फिर से शून्य से शिखर तक का सफर तय करेगी।

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