ममता बनर्जी ओर सुवेंदु अधिकारी, फोटो- सोशल मीडिया 
पश्चिम बंगाल

बंगाल चुनाव का गणित: फेज-1 में BJP की अग्निपरीक्षा और फेज-2 में TMC का अभेद्य किला; क्या भाजपा पलट पाएगी बाजी?

BJP vs TMC: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में असली मुकाबला पहले चरण की सीटों पर सिमट गया है। जहां पहले चरण में भाजपा की कई कमजोर सीटें दांव पर हैं, वहीं दूसरा चरण टीएमसी का सबसे मजबूत गढ़ माना जा रहा है।

प्रतीक पाण्डेय

West Bengal Election 2026: 2026 के चुनावी समर में पश्चिम बंगाल इकलौता ऐसा राज्य है जहां मतदान दो चरणों में संपन्न होगा। निर्वाचन आयोग ने इस बार सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स की बेहतर दक्षता का हवाला देते हुए 2021 के 8 चरणों के मुकाबले इस बार पूरी प्रक्रिया को महज दो चरणों में समेट दिया है। लेकिन आंकड़ों का विश्लेषण एक चौंकाने वाली कहानी बयां करता है- दोनों चरणों का राजनीतिक वजन एक जैसा नहीं है।

पहले चरण में जहां भाजपा को अपनी संकरी जीत वाली सीटें बचाने के लिए पसीना बहाना होगा, वहीं दूसरे चरण में ममता बनर्जी की टीएमसी एक ऐसी स्थिति में है जहां उसे हराना फिलहाल नामुमकिन जैसा लग रहा है।

फेज-1 की 26 सीटों पर फंसा है पेंच

पुराने रिकार्ड तलाशें तो 23 अप्रैल को होने वाला पहला चरण भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। 2021 के चुनाव में भाजपा ने जिन 77 सीटों पर जीत दर्ज की थी, उनमें से 59 सीटें इसी पहले चरण वाले क्षेत्रों में आती हैं। भाजपा के लिए चिंता की बात यह है कि इन 59 में से 26 सीटें ऐसी थीं जहां भाजपा की जीत का अंतर 5 फीसदी से भी कम था। यानी अगर दो-चार फीसदी वोट भी इधर-उधर हुए, तो इन सीटों का नतीजा पूरी तरह पलट सकता है। भाजपा के पास पहले चरण में केवल एक ऐसी सीट है जहां उसने 20 फीसदी से ज्यादा अंतर से जीत पाई थी, जो उसकी कमजोर जमीनी पकड़ की ओर इशारा करता है।

फेज-2 में है टीएमसी का 'पावरहाउस'

इसके उलट 29 अप्रैल को होने वाला दूसरा चरण पूरी तरह से तृणमूल कांग्रेस के दबदबे वाला है। इस चरण की 142 सीटों में से 123 पर फिलहाल टीएमसी का झंडा लहरा रहा है। टीएमसी की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पहले चरण की भी 92 सीटों में से 29 पर उसने 20 फीसदी से ज्यादा बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। दूसरे चरण में सबसे ज्यादा नजरें भवानीपुर और नंदीग्राम पर होंगी, जो 2021 के संग्राम के सबसे बड़े प्रतीक रहे हैं।

बहुमत का आंकड़ा और 'बिखरा हुआ' विपक्ष: किसे होगा फायदा?

बंगाल विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीटों की जरूरत है। वर्तमान में टीएमसी 223 सीटों के साथ बेहद मजबूत स्थिति में है, जबकि भाजपा की ताकत उपचुनावों और दलबदल के कारण 77 से घटकर 65 रह गई है। भाजपा को सत्ता तक पहुंचने के लिए अभी अपनी मौजूदा सीटों के अलावा 83 और सीटें जीतनी होंगी।

वहीं विपक्षी गठबंधन की स्थिति अब भी उलझी हुई है; कांग्रेस अकेले लड़ने की तैयारी में है, और वाम मोर्चे का अन्य दलों के साथ गठबंधन के फेर में है। टीएमसी 291 सीटों पर अकेले उतर रही है और 3 सीटें उसने अपने सहयोगी BGPM (अनित थापा) को दी हैं।

आपको बता दें कि इस बार का चुनाव 28 फरवरी को जारी हुई फाइनल वोटर लिस्ट के साये में होगा, जिसमें से 63 लाख से ज्यादा नाम काट दिए गए हैं। राज्य में अब कुल 7 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर हैं, जिनमें 3.6 करोड़ पुरुष और 3.4 करोड़ महिलाएं शामिल हैं।

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