ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी, फोटो (सो सोशल मीडिया) 
पश्चिम बंगाल

ममता बनर्जी को खुली चुनौती? चुनाव आयोग पहुंचा बागी गुट, खुद को बताया 'असली TMC'

TMC Crisis: पश्चिम बंगाल में टीएमसी के बागी गुट ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में चुनाव आयोग से मिलकर पार्टी के नाम, संगठन और चुनाव चिह्न पर दावा ठोका है। वहीं, ममता गुट ने इसे खारिज कर दिया है।

अर्पित शुक्ला

West Bengal TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर मचे घमासान ने अब नया मोड़ ले लिया है। पार्टी से बगावत करने वाले नेताओं ने अब पूरी पार्टी, उसके नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा पेश कर दिया है। ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व में बागी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को चुनाव आयोग से मुलाकात कर खुद को "असली टीएमसी" बताते हुए 11 पन्नों का दस्तावेज और कथित सबूत सौंपे।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को बताया कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव किया गया है और नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन हो चुका है। साथ ही नए पदाधिकारियों की सूची भी आयोग को सौंप दी गई है।

चुनाव आयोग को दी नए कार्यालय की जानकारी

बागी गुट ने चुनाव आयोग को बताया कि पार्टी का नया कार्यालय फिलहाल कोलकाता के राजडांगा मेन रोड स्थित एक भवन में बनाया गया है। हालांकि ऋतब्रत बनर्जी ने स्पष्ट किया कि यह अस्थायी व्यवस्था है और स्थायी मुख्यालय के लिए नई जगह की तलाश जारी है। उन्होंने कहा कि उपयुक्त स्थान मिलते ही नए मुख्यालय के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का दावा

बागी नेताओं ने कहा कि विशेष अधिवेशन के बाद राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने कार्यवाहक अध्यक्ष, महासचिव और कोषाध्यक्ष समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियां की हैं। इन सभी पदाधिकारियों के नाम भी चुनाव आयोग को सौंपे गए हैं। दस्तावेज में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि पार्टी के वित्तीय मामलों में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो उसकी जांच स्वतंत्र ऑडिटर से कराई जाएगी।

'यह सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया थी'

चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि विशेष अधिवेशन में हुए फैसलों और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन की जानकारी आयोग को देना एक नियमित प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के नए संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व संबंधी निर्णयों की सूचना दिल्ली और राज्य स्तर पर चुनाव आयोग को दे दी गई है।

ममता गुट ने किया पलटवार

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी गुट के नेता कुणाल घोष ने बागी नेताओं के दावे को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में जिन विधायकों ने टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़ा था, उनके नामांकन पत्रों के साथ जमा किए गए फॉर्म-ए और फॉर्म-बी पर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर मौजूद हैं। कुणाल घोष ने कहा कि उन्हीं हस्ताक्षरों के आधार पर ये नेता विधायक बने और अब खुद को असली टीएमसी बताने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और समय आने पर जवाब भी देगी।

बीजेपी ने भी साधा निशाना

इस राजनीतिक विवाद के बीच भाजपा ने भी टीएमसी पर तंज कसा है। भाजपा नेता शिशिर बजोरिया ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने चुनाव में स्पष्ट जनादेश दिया है और अब टीएमसी का अस्तित्व संकट में दिखाई दे रहा है।

उन्होंने दावा किया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली पार्टी अब आंतरिक कलह से जूझ रही है और देखते ही देखते उसका संगठन बिखरता नजर आ रहा है। बजोरिया ने कहा कि जनता ने अपना फैसला सुना दिया है और अब टीएमसी के भीतर की टूट खुलकर सामने आ रही है। इस बीच, पूरे घटनाक्रम के दौरान अभिषेक बनर्जी के ममता बनर्जी से मुलाकात के लिए उनके आवास पहुंचने की भी चर्चा रही, जिससे पार्टी के भीतर जारी संकट को लेकर राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं।

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