ममता बनर्जी, फोटो- नवभारत डिजाइन 
पश्चिम बंगाल

ममता का मास्टरस्ट्रोक: चुनाव से पहले कानून मंत्रालय अपने पास लिया, आखिर क्या है 'दीदी' का मेगा प्लान?

Bengal Law Ministry: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा फेरबदल करते हुए कानून मंत्रालय की कमान खुद संभाल ली है, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है।

प्रतीक पाण्डेय

Cabinet Realignment West Bengal: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने सधे हुए कदमों से सबको चौंका दिया है। आगामी विधानसभा चुनावों की बढ़ती सियासी तपिश के बीच 'दीदी' अब फ्रंटफुट पर खेलने के मूड में नजर आ रही हैं।

सोमवार को राज्य सचिवालय द्वारा जारी एक अधिसूचना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी, जिसके तहत मुख्यमंत्री ने राज्य के कानून और न्यायिक विभाग की जिम्मेदारी अब सीधे अपने हाथों में ले ली है। यह फैसला सिर्फ एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी राजनीतिक रणनीति छिपी हुई है।

मलॉय घटक से क्यों छिना विभाग, क्या थी असली नाराजगी?

अभी तक बंगाल सरकार के वरिष्ठ मंत्री मलॉय घटक श्रम विभाग के साथ-साथ कानून मंत्रालय का कार्यभार भी संभाल रहे थे। अचानक हुए इस बदलाव के बाद अब वह पूरी तरह से केवल श्रम विभाग की जिम्मेदारी ही देखेंगे। सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आ रही है कि मुख्यमंत्री पिछले काफी समय से कानून विभाग के कामकाज के तौर-तरीकों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थीं। टीएमसी के भीतर भी उनके काम को लेकर कुछ नाराजगी की खबरें थीं। ऐसे में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ममता बनर्जी ने विभाग की बागडोर खुद संभालकर प्रशासन में कसावट लाने की कोशिश की है। वे कानूनी मामलों में तेजी लाने और विभाग पर अपनी सीधी पकड़ बनाना चाहती हैं।

CBI-ED की जांच के बीच 'दीदी' का बड़ा कानूनी हस्तक्षेप

पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ समय से राज्य सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED/CBI) के बीच टकराव की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। पूर्व कानून मंत्री मलॉय घटक खुद भी कथित कोयला तस्करी घोटाले के मामले में जांच के दायरे में रहे हैं और एजेंसियों के सामने पेश होने में हुई देरी के कारण विवादों में थे। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद भी पिछले दिनों सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाइयों में काफी सक्रिय नजर आई हैं।

कानून मंत्रालय अपने पास रखकर वे इन एजेंसियों के खिलाफ बनाई जाने वाली कानूनी रणनीति को और भी मजबूती और आक्रामकता देना चाहती हैं। इससे न केवल नौकरशाही बल्कि कानूनी सलाहकारों पर भी उनका सीधा नियंत्रण होगा, जो चुनाव के समय अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

2026 के चुनावी महासंग्राम की तैयारी में ममता बनर्जी का मास्टरस्ट्रोक

यह फेरबदल 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी द्वारा अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में टीएमसी नेता बाबुल सुप्रियो के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद उनके मंत्रिमंडल से हटने के कारण सूचना प्रौद्योगिकी, औद्योगिक पुनर्निर्माण और सार्वजनिक उद्यम जैसे विभाग भी खाली हो गए थे। फिलहाल इन विभागों का कार्यभार भी मुख्यमंत्री ने अपने पास ही रखा है।

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