वायरल वीडियो के स्क्रीनशॉट। (सोर्स - सोशल मीडिया) 
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अमेरिका में मामूली घुटने की चोट, एनआरआई को थमाया गया 5 लाख रुपये का बिल! वीडियो देख हैरान हुए लोग

USA Medical Cost : न्यूयॉर्क में मामूली घुटने की चोट पर एनआरआई को 5 लाख रुपये का मेडिकल बिल चुकाना पड़ा, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल। कई यूजर्स ने भारत के हेल्थ सिस्टम की तारीफ की।

हितेश तिवारी

NRI Hospital Bill : आमतौर पर जब भी किसी को हल्की-फुल्की चोट लगती है, तो लोग घर पर दवा या बैंडेज लगाकर खुद को ठीक करने की कोशिश करते हैं। इतनी छोटी चोट के लिए लाखों रुपये खर्च करने की कोई कल्पना भी नहीं करता। लेकिन अमेरिका में रहने वाले एक एनआरआई के साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसने सभी को चौंका दिया।

न्यूयॉर्क घूमने के दौरान उनके घुटने में मामूली चोट लगी और इस चोट के इलाज के लिए उन्हें करीब 5 लाख रुपये का मेडिकल बिल चुकाना पड़ा। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोग अमेरिका की महंगी हेल्थकेयर सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं।

अमेरिका में इलाज की महंगाई

इस एनआरआई का नाम पार्थ विजयवर्गीय बताया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 25 दिसंबर को न्यूयॉर्क में घूमते वक्त उनके घुटने में चोट लग गई थी। हालत गंभीर नहीं थी, लेकिन दर्द के कारण उन्हें अस्पताल जाना पड़ा। एम्बुलेंस का खर्च ज्यादा होने की वजह से वह खुद ही अस्पताल पहुंचे।

अस्पताल के इमरजेंसी रूम में डॉक्टरों ने केवल बैंडेज बांधी और प्राथमिक जांच की। बाद में जब इंश्योरेंस कंपनी की तरफ से डिटेल आई, तो पता चला कि सिर्फ बैंडेज और इमरजेंसी ट्रीटमेंट के लिए उनसे करीब 1800 डॉलर यानी लगभग डेढ़ लाख रुपये चार्ज किए गए।

लोगों ने भारत के हेल्थ सिस्टम की तारीफ

इतना ही नहीं, इस इलाज के बाद भी इंश्योरेंस कंपनी ने करीब 4500 डॉलर यानी 4 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान अस्पताल को किया। कुल मिलाकर मामूली चोट के इलाज पर खर्च 5 लाख रुपये के आसपास पहुंच गया। पार्थ ने इस वीडियो के जरिए अमेरिका में इलाज की महंगाई को लोगों के सामने रखा है। वीडियो वायरल होने के बाद यूजर्स तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं।

कुछ लोग अमेरिका की सैलरी और खर्चों की तुलना कर रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि वहां कमाई ज्यादा है, लेकिन मेडिकल खर्च भी उतना ही भारी है। कई यूजर्स ने भारत के हेल्थ सिस्टम की तारीफ करते हुए कहा कि ऐसी छोटी चोट का इलाज भारत में बेहद कम खर्च में हो जाता है। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि अमेरिका में इलाज कराना आम लोगों के लिए कितना महंगा साबित हो सकता है।

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