नागपुर के राजस्व विभाग के अपर आयुक्त की नेमप्लेट (सोर्स: सोशल मीडिया) 
वायरल

'मैं अपनी सैलरी से संतुष्ट...', नागपुर के अधिकारी ने नेमप्लेट पर लिखा ये मैसेज, सोशल मीडिया पर वायरल

Nagpur Viral news: नागपुर के अतिरिक्त राजस्व आयुक्त राजेश खवले ने अपनी नेम प्लेट पर एक बोर्ड लगाया, जिसने सबका ध्यान खींचा। इस पर लिखा था “मैं अपनी सैलरी से संतुष्ट हूं।”

आकाश मसने

Rajesh Khawale Name Plate Viral News: महाराष्ट्र में जहां भ्रष्टाचार से जुड़े बड़े मामले सामने आ रहे हैं, वहीं नागपुर के संभागीय आयुक्त कार्यालय में तैनात अतिरिक्त राजस्व आयुक्त राजेश खवले ने ईमानदारी की अनोखी मिसाल पेश की है। उन्होंने अपनी नेमप्लेट के साथ एक छोटा-सा बोर्ड लगाकर लोगों का दिल जीत लिया है।

नागपुर के संभागीय आयुक्त कार्यालय में कार्यरत अतिरिक्त राजस्व आयुक्त राजेश खवले ने अपनी नेमप्लेट के नीचे एक छोटा-सा बोर्ड लगाकर सनसनी मचा दी है। इस बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लिखा है, “मैं अपनी सैलरी से संतुष्ट हूं।” यह छोटा-सा कदम ऐसे समय में ईमानदारी की बड़ी मिसाल बन गया है, जब महाराष्ट्र में लाखों रुपये के बंडलों से जुड़े दो मामले उजागर हुए हैं।

अवैध लाभ लेने वालों को स्पष्ट संदेश

खवले ने मीडिया को वीडियो पर बयान देने से मना कर दिया, लेकिन उन्होंने इस बोर्ड को लगाने के पीछे की वजह बताई। खवले के मुताबिक, उनका कामकाज विदर्भ के कई जिलों में फैला हुआ है और रोजाना ग्रामीण इलाकों से कई लोग उनसे मिलने आते हैं। वह चाहते थे कि लोगों को उनकी कार्यप्रणाली और नीयत का स्पष्ट संदेश मिले। इसलिए उन्होंने यह बोर्ड लगाया, ताकि यह साफ हो जाए कि वह किसी तरह के अवैध लाभ या रिश्वत के इच्छुक नहीं हैं।

सोशल मीडिया पर तहलका

सोशल मीडिया पर खवले का यह बोर्ड तेजी से वायरल हो गया है। खासकर उस माहौल में, जब राज्य में दो वीडियो राजनीतिक नेताओं और अधिकारियों के कथित भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहे हैं। ऐसे में खवले का यह छोटा-सा कदम लोगों के लिए उम्मीद का नया संदेश बन गया है।

नेताओं ने की सराहना

डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना के नेता कृपाल तुमाने ने इस ईमानदार पहल की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि अगर देश की नौकरशाही इस तरह काम करने लगे तो भारत अमेरिका से भी आगे निकल जाएगा। तुमाने ने यह भी तर्क दिया कि सातवें वेतन आयोग के बाद अधिकारियों को अच्छी सैलरी मिल रही है, इसलिए सभी को अपने वेतन से संतुष्ट रहना चाहिए। उन्होंने अन्य अधिकारियों से भी खवले की इस सोच को अपनाने की अपील की है।

राजेश खवले का यह कदम उस दीवार की तरह है जो भ्रष्टाचार और ईमानदारी के बीच खड़ी हो जाती है, यह साफ संदेश देता है कि सरकारी सेवा सिर्फ वेतन के लिए है, अवैध कमाई के लिए नहीं।

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