Domestic Help Abuse : गुरुग्राम की एक पॉश सोसाइटी से घरेलू सहायिका की कथित पिटाई का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि Camellias गुरुग्राम स्थित एक घर में मेड के साथ मारपीट की गई।
बताया गया कि पड़ोसियों ने कई बार महिला को कथित तौर पर परेशान होते देखा था, लेकिन जब मामला हद से बढ़ता नजर आया तो उन्होंने घर के रोशनदान से पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। खास बात यह है कि रोशनदान काफी छोटा है, लेकिन वीडियो में घटना साफ दिखाई देती है।
वीडियो को दीपिका नारायण भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर शेयर किया और मामले की जानकारी सार्वजनिक की। क्लिप सामने आने के बाद घरेलू सहायिकाओं के साथ होने वाले व्यवहार और उनके अधिकारों को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई।
वायरल वीडियो में एक व्यक्ति की आवाज सुनाई देती है, जो कहता है कि अभी महिला उसे मारेगी। इसके कुछ देर बाद एक महिला किचन में मौजूद घरेलू सहायिका के पास आती दिखाई देती है और उसके साथ मारपीट करती नजर आती है।
वीडियो में महिला को कथित तौर पर थप्पड़ मारते और बाल पकड़ते हुए देखा जा सकता है। पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि घरेलू सहायिका का मोबाइल फोन ले लिया गया था और उसे घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। हालांकि, वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मामले को लेकर पुलिस से संपर्क किए जाने के बाद कार्रवाई की जानकारी सामने आई। बाद में सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपडेट में बताया गया कि घरेलू सहायिका घर से बाहर आ चुकी है, लेकिन उसने किसी तरह की कानूनी कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है।br
मामले को लेकर घर के एक कारोबारी की ओर से अलग दावा सामने आया है। बताया गया कि महिला से मारपीट किसी लंबे विवाद के कारण नहीं, बल्कि गुस्से में थप्पड़ मारने की घटना थी और उसी दौरान किसी व्यक्ति ने वीडियो बना लिया।
इस मामले में वायरल वीडियो के अलावा सामने आए अलग-अलग दावों को ध्यान में रखते हुए पूरी सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। घटना ने एक बार फिर घरेलू कामगारों की सुरक्षा और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घर में लंबे समय तक काम करने वाले घरेलू सहायकों के साथ किसी भी तरह की हिंसा या जबरदस्ती को सामान्य नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में शिकायत सामने आने पर संबंधित एजेंसियों और पुलिस की जांच के जरिए तथ्यों की पुष्टि जरूरी है।