अयोध्या: भारत एक कृषि प्रधान देश है। यह हम बचपन से पढ़ते और सुनते आए हैं। लेकिन यूरोप और अमेरिका पाकिस्तान और श्रीलंका से धान ख़रीद रहे हैं। जबकि भारतीय धान के नमूने परीक्षण में फेल हो जा रहे हैं। यह मैं नहीं बल्कि गुज़रात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत कह रहे हैं।
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने शनिवार को कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका से यूरोपीय देश व अमेरिका धान खरीद रहे मगर हमारे नमूने यूरोपीय देशों में गुणवत्ता परीक्षण में विफल हो रहे हैं। अयोध्या में नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित प्राकृतिक खेती परामर्श संगोष्ठी में राज्यपाल ने कहा, ‘‘यूरोप और अमेरिका पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका से धान खरीद रहे हैं और हमारे नमूने यूरोपीय देशों में फेल हो रहे हैं।"
उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर आधारित खेती के बजाय प्राकृतिक खेती की ओर लौटने पर जोर दिया। राज्यपाल ने कहा, ‘‘हमारे देश के किसानों को रासायनिक खाद का प्रयोग बंद कर प्राकृतिक और जैविक खेती का रास्ता अपनाना होगा। अगर 10 साल के बच्चे को कैंसर हो रहा है तो इसका मुख्य कारण खान-पान है और इसके लिए भारी मात्रा में रसायनों का प्रयोग करने वाली हमारी हिंसक कृषि प्रणाली जिम्मेदार है।''
देवव्रत ने कहा कि 40 साल पहले कैंसर, मधुमेह और रक्तचाप जैसी बीमारियां नहीं थीं, लेकिन आज हर व्यक्ति इन प्रकार की बीमारियों से जूझ रहा है, आज की कृषि प्रणाली हिंसक हो गई है जो धीरे-धीरे इंसानों की जिंदगी को निगल रही है।'' उन्होंने कहा, ‘‘हमें समय रहते सचेत होने की जरूरत है। यूएनओ की रिपोर्ट के अनुसार 40 से 50 साल में दुनिया की जमीन बंजर हो जाएगी और कोई खाद्यान्न पैदा नहीं होगा।'
राज्यपाल ने कहा कि केंचुए धरती को उपजाऊ बनाने का काम करते हैं, लेकिन अधिक फसल पैदा करने के लिए किसानों द्वारा रासायनिक खाद के इस्तेमाल से उनकी मौत हो जाती है। भविष्य के खतरों से आगाह करते हुए देवव्रत ने कहा, ‘‘यूरिया में 46 प्रतिशत नमक होता है और धरती का ऑर्गेनिक कार्बन 0.6 हो गया है, जमीन बंजर हो गई है, भोजन, पानी और हवा को अशुद्ध बनाने के लिए हम ही जिम्मेदार हैं। अगर भविष्य में भी यही स्थिति रही तो इंसान बच्चे भी पैदा नहीं कर पाएगा।