Highlights:
वाराणसी की दोनों एमएलसी सीटों पर सपा का पीडीए दांव
शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कब्जा बरकरार रखने की चुनौती
सीटों पर वापसी के लिए भाजपा ने भी झोंकी ताकत
सपा, पुरानी पेंशन और आरक्षण के मुद्दे पर दिया जोर
Varanasi Teacher MLC Seat: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में दोनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच मुकाबला दिलचस्प होने के आसार हैं। पिछले चुनाव में दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने वाली सपा के सामने अपना कब्जा बरकरार रखने की चुनौती है, जबकि भाजपा इन सीटों पर वापसी के लिए रणनीति बनाने में जुटी है।
समाजवादी पार्टी ने चुनावी अभियान को धार देने के लिए सांसद वीरेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी घर-घर संपर्क अभियान के जरिए शिक्षक और स्नातक मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। वहीं, भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षकों और प्रबुद्ध वर्ग के बीच सरकार की उपलब्धियां गिनाकर विपक्ष को घेर रहे हैं। ऐसे में दोनों दलों के बीच चुनावी मुकाबला तेज होने के संकेत हैं।
वाराणसी खंड की स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट पर पिछले चुनाव में सपा के आशुतोष सिन्हा ने भाजपा के केदारनाथ सिंह को 3,850 मतों से पराजित किया था। आशुतोष सिन्हा को 26,535 वोट मिले थे, जबकि केदारनाथ सिंह के खाते में 22,685 मत आए थे।
वहीं, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के लाल बिहारी यादव ने भाजपा के डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को 936 मतों से हराया था। लाल बिहारी यादव को 7,766 और प्रमोद कुमार मिश्रा को 6,830 वोट मिले थे। दोनों सीटों पर पिछली हार के बाद भाजपा के सामने इस बार अपना प्रदर्शन सुधारने की चुनौती है।
समाजवादी पार्टी चुनाव में पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण के साथ शिक्षकों और स्नातकों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दे रही है। पुरानी पेंशन योजना, भर्ती प्रक्रिया, पेपर लीक और आरक्षण से जुड़े सवालों के जरिए पार्टी मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश में है। 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़े विवाद को भी सपा अपने राजनीतिक अभियान में उठा रही है।
सांसद वीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में पार्टी के पदाधिकारी मतदाताओं से सीधे संपर्क साधने और संगठन को सक्रिय करने में जुटे हैं। सपा को उम्मीद है कि शिक्षकों और स्नातकों से जुड़े मुद्दे चुनाव में उसके पक्ष में माहौल बनाने में मदद करेंगे।
दूसरी ओर भाजपा ने भी चुनावी तैयारी तेज कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षक-स्नातक सम्मेलन के जरिए सरकार की उपलब्धियां गिनाने के साथ सपा के शासनकाल पर सवाल उठा चुके हैं। शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा, शिक्षामित्रों के मानदेय में बढ़ोतरी और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कदमों को भाजपा अपने पक्ष में प्रमुखता से रख रही है।
पार्टी की रणनीति संगठनात्मक सक्रियता के साथ सरकार के कामकाज को मतदाताओं तक पहुंचाने की है। भाजपा को उम्मीद है कि इस अभियान के जरिए दोनों सीटों पर जीत की संभावनाएं मजबूत होंगी।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में निर्दलीय प्रत्याशी सुनील सिंह यादव की मौजूदगी भी चुनावी चर्चा का विषय है। सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि भाजपा ने सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से निर्दलीय उम्मीदवार को मैदान में उतरवाया है। उन्होंने चुनावी माहौल में सरकारी गतिविधियों और एयर शो के आयोजन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल वाराणसी की दोनों एमएलसी सीटों पर भाजपा और सपा अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में हैं। भाजपा के लिए यह पिछली हार के बाद वापसी का मौका है, जबकि सपा के सामने अपनी दोनों सीटें बचाने की चुनौती है। चुनाव में शिक्षकों और स्नातक मतदाताओं का रुख किस दल के पक्ष में जाता है, इस पर दोनों पार्टियों की नजर रहेगी।