13 करोड़ वोट चोरी के आरोपों को संबित पात्रा ने दिया राजनीतिक दुष्प्रचार करार
राहुल गांधी पर 56 चुनावों में हार के बाद भी जिम्मेदारी न लेने का आरोप
जून 2025 से अब तक 2.37 करोड़ युवा मतदाताओं के नाम जुड़ने का दावा
कांग्रेस और सपा को बूथ स्तर पर मतदाता सूची की जांच करने की चुनौती दी
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद संबित पात्रा ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधा। सोमवार को वाराणसी के सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि 13 करोड़ वोट चोरी का आरोप लगाकर देश में भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि एसआईआर मतदाता सूची के शुद्धिकरण की संवैधानिक प्रक्रिया है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी हमला बोला। पात्रा ने कहा कि घुसपैठियों को मतदाता बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती और मतदाता सूची में केवल पात्र नागरिकों के नाम होने चाहिए।
संबित पात्रा ने कहा कि एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है। उनके मुताबिक, देश में अब तक 12 बार विशेष गहन पुनरीक्षण हो चुका है, जिनमें दस बार कांग्रेस के शासनकाल और दो बार भाजपा के शासनकाल में यह प्रक्रिया अपनाई गई। ऐसे में इसे भाजपा की राजनीतिक साजिश बताना तथ्यों की अनदेखी है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया का उद्देश्य सूची को दुरुस्त करना है।
उन्होंने दावा किया कि करीब तीन करोड़ लोग अनुपस्थित श्रेणी में चिह्नित हुए, छह करोड़ लोगों ने फॉर्म-6 के माध्यम से नाम जुड़वाने की प्रक्रिया अपनाई और छह करोड़ स्थानांतरित मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए। पात्रा ने इन आंकड़ों के आधार पर 13 करोड़ वोट चोरी का आरोप लगाने को राजनीतिक दुष्प्रचार करार दिया।
कांग्रेस की चुनावी स्थिति पर सवाल उठाते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी चुनाव में हार के बाद कभी ईवीएम तो कभी चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2014 से 2025 के बीच कांग्रेस को 56 विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। पात्रा ने सवाल किया कि तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में कांग्रेस की चुनावी कमजोरी के लिए भी क्या एसआईआर जिम्मेदार है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक विफलताओं की समीक्षा करनी चाहिए, न कि हर हार के लिए संवैधानिक संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराना चाहिए।
राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी को भी निशाने पर लेते हुए पात्रा ने कांग्रेस नेतृत्व के आपसी तालमेल पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर आरोप लगाने से पहले कांग्रेस को अपने संगठन और राजनीतिक रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए पात्रा ने कहा कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार भारतीय नागरिकों का है। घुसपैठियों को मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की 20 विधानसभा सीटों के उदाहरण में जिन क्षेत्रों में सर्वाधिक मतदाताओं के नाम कटे, उनमें से अधिकांश सीटों पर तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की। उनके मुताबिक, यह तथ्य नाम काटकर भाजपा को चुनाव जिताने के आरोपों पर सवाल खड़े करता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की निष्पक्षता पर उठाए जा रहे सवालों का जवाब देते हुए पात्रा ने कहा कि भाजपा उनके मुख्य चुनाव आयुक्त बनने से पहले ही 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव जीत चुकी थी। उन्होंने बताया कि ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला था। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय वीएस संपत मुख्य चुनाव आयुक्त थे, जिनकी नियुक्ति कांग्रेस शासनकाल में हुई थी। इसके बावजूद भाजपा को बहुमत मिला था। पात्रा ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर राजनीतिक आरोप लगाने के बजाय तथ्यों के आधार पर सवाल उठाए जाने चाहिए।
एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही का उल्लेख करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया है, बल्कि घोषणा पत्र के माध्यम से वर्ष 2002 से 2004 के बीच मतदाता सूची में नाम होने से संबंधित जानकारी मांगी गई है। उन्होंने दावा किया कि जून 2025 से अब तक 18 से 28 वर्ष के आयु वर्ग के करीब 2.37 करोड़ युवाओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए हैं।
उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को बूथ स्तर पर मतदाता सूची की जांच करने की चुनौती भी दी। पात्रा ने कहा कि चुनाव आयोग ने मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को बूथ लेवल एजेंट नियुक्त करने का अधिकार दिया है। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम छूटा है या किसी अपात्र व्यक्ति का नाम दर्ज है, तो राजनीतिक दलों को उसे सामने लाकर सुधार की मांग करनी चाहिए। केवल आरोप लगाने से लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत नहीं होगी।