Highlights:
काशी की दिव्य गंगा आरती में मंत्रमुग्ध हुए गोवा के राज्यपाल
सपरिवार किया मां गंगा का पूजन
दशाश्वमेध घाट पर पत्नी और परिवार के साथ पहुंचे पुसापति अशोक गजपति राजू
वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच लिया मां गंगा की आरती का आशीर्वाद
Goa Governor Varanasi Visit: धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में मां गंगा की भव्य आरती देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। इसी क्रम में गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू अपनी धर्मपत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पहुंचे।
यहां उन्होंने विश्वप्रसिद्ध मां गंगा की आरती में सहभागिता की और दीपों की अलौकिक आभा, वैदिक मंत्रोच्चार तथा शंखनाद के बीच आरती के दिव्य दृश्य को निहारा। काशी की आध्यात्मिक छटा और गंगा आरती की भव्यता से राज्यपाल मंत्रमुग्ध नजर आए।
दशाश्वमेध घाट पर आयोजित गंगा आरती के दौरान गोवा के राज्यपाल ने अपनी पत्नी और परिवार के सदस्यों के साथ मां गंगा का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। उन्होंने मां गंगा के समक्ष श्रद्धा अर्पित करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान घाट पर आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला।
गंगा आरती की पारंपरिक विधियों, मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच मां गंगा की आराधना ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक मानी जाने वाली दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। मां गंगा की आरती के दौरान एक साथ प्रज्वलित होने वाले दीप, गंगा की लहरों पर पड़ती रोशनी और आचार्यों द्वारा की जाने वाली आरती का दृश्य श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करता है। राज्यपाल ने भी परिवार के साथ इस आध्यात्मिक आयोजन में सहभागिता कर मां गंगा के दर्शन किए।
गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू दशाश्वमेध घाट पर लगभग 45 मिनट तक मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने मां गंगा की आरती के दर्शन किए और काशी की धार्मिक परंपरा का अनुभव किया। उनका घाट पर पहुंचना और आरती में शामिल होना आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा।
गंगा सेवा निधि की ओर से आयोजित इस भव्य आरती के अवसर पर संस्था के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा और सचिव सुरजीत सिंह ने गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू तथा उनके परिवार का स्वागत एवं अभिनंदन किया। संस्था की ओर से राज्यपाल को अंगवस्त्र और प्रसाद भेंट किया गया।
इस दौरान काशी की परंपराओं के अनुरूप अतिथियों का सम्मान किया गया। मां गंगा की आरती के माध्यम से काशी की धार्मिक विरासत, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक पहचान की झलक देखने को मिली। दशाश्वमेध घाट पर आयोजित यह आरती एक बार फिर काशी की उस विशिष्ट परंपरा का प्रतीक बनी, जो देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है।