पूर्व CBI निदेशक एम. नागेश्वर राव  (सोर्स- सोशल मीडिया)
वाराणसी

प्रशासनिक सेवा से सियासत तक एम. नागेश्वर राव का सफर, काशी से यूपी की 403 सीटों पर चुनावी ऐलान

M Nageshwar Rao Politics: पूर्व CBI निदेशक एम. नागेश्वर राव ने काशी से राजनीति में एंट्री करते हुए सर्वजन सनातन पार्टी की कमान संभाली और यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया।

धर्मेंद्र कुमार चौबे, स्निग्धा श्रीवास्तव

M Nageshwar Rao UP Election: उत्तर प्रदेश की सियासत में प्रशासनिक सेवा से जुड़े एक और बड़े चेहरे की एंट्री से राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। पूर्व CBI निदेशक और 1986 बैच के ओडिशा कैडर के पूर्व IPS अधिकारी एम. नागेश्वर राव ने काशी की धरती से सक्रिय राजनीति में कदम रखने का ऐलान कर दिया है। वाराणसी में उन्होंने ‘सर्वजन सनातन पार्टी’ (SSP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालते हुए उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है।

करीब चार दशक तक पुलिस, सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और प्रशासन के क्षेत्र में काम करने के बाद अब नागेश्वर राव राजनीतिक मंच के जरिए जनता के बीच उतरेंगे। उनकी राजनीतिक एंट्री ऐसे समय में हुई है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हो रही हैं। इससे यूपी के राजनीतिक गलियारों में प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाले चेहरों की बढ़ती सक्रियता को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

दिव्या मित्तल के बाद नागेश्वर राव की राजनीतिक एंट्री

पूर्व CBI निदेशक एम. नागेश्वर राव की राजनीतिक एंट्री को हाल के दिनों में प्रशासनिक सेवा से जुड़े चेहरों के राजनीति में आने की कड़ी में देखा जा रहा है। पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल भी सक्रिय राजनीति में आने की घोषणा कर चुकी हैं और स्वतंत्र राजनीतिक मंच के जरिए जनता के बीच जाने की बात कह चुकी हैं।

अब नागेश्वर राव ने इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए बाकायदा राजनीतिक दल की कमान संभाली है और प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।

हालांकि दोनों की राजनीतिक राह अलग है। दिव्या मित्तल ने स्वतंत्र राजनीतिक मंच की बात कही है, जबकि नागेश्वर राव ने सर्वजन सनातन पार्टी के जरिए सीधे चुनावी राजनीति में उतरने का रास्ता चुना है।

काशी से सियासी सफर की शुरुआत

नागेश्वर राव ने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत के लिए काशी को चुना है। वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के साथ ही भारतीय सभ्यता और सनातन परंपरा का प्रमुख केंद्र भी है।

नागेश्वर राव के मुताबिक काशी से राजनीतिक यात्रा शुरू करने का उद्देश्य अतीत में लौटना नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना है। उनका जोर ऐसे भारत पर है, जो विज्ञान, तकनीक और आर्थिक विकास में आगे बढ़े, लेकिन अपनी सभ्यतागत और सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ा रहे।

यही वजह है कि उनकी पार्टी के राजनीतिक एजेंडे में विकास और प्रशासन के साथ सनातन संस्कृति को भी प्रमुख स्थान दिया गया है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका को राजनीतिक एजेंडे में प्रमुख स्थान

सर्वजन सनातन पार्टी ने अपने राजनीतिक विजन में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और सभ्यतागत जुड़ाव को प्रमुख आधार बनाया है।

नागेश्वर राव का कहना है कि प्रत्येक व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा मिलनी चाहिए। स्वास्थ्य व्यवस्था को भी आम जनता के लिए अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने की जरूरत है।

इसके अलावा युवाओं, किसानों, कारीगरों, मजदूरों, छोटे कारोबारियों और उद्यमियों के लिए सम्मानजनक आजीविका तथा रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने को पार्टी के एजेंडे में शामिल किया गया है।

पार्टी भारतीय भाषाओं, कला, मंदिरों, तीर्थस्थलों, त्योहारों और ज्ञान परंपराओं को भी देश की सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा मानते हुए इनके संरक्षण और संवर्धन की बात कर रही है।

‘सनातन सिर्फ पूजा-पद्धति नहीं’

एम. नागेश्वर राव ने सनातन की अपनी राजनीतिक और सामाजिक व्याख्या भी सामने रखी है। उनके अनुसार सनातन केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि सत्य, धर्म, कर्तव्य, न्याय, करुणा और जनकल्याण पर आधारित जीवन-दृष्टि है।

उनका संदेश है-‘सत्य सनातन, नित्य नूतन।’

नागेश्वर राव का कहना है कि भारत को आधुनिक विज्ञान, तकनीक और आर्थिक विकास के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन विकास की दौड़ में अपनी सभ्यतागत जड़ों और सांस्कृतिक विरासत को पीछे नहीं छोड़ना चाहिए।

गौ-संरक्षण के मुद्दे पर भी स्पष्ट रहा है रुख

नागेश्वर राव के सार्वजनिक विमर्श में सनातन के साथ गौ-संरक्षण का मुद्दा भी पहले से दिखाई देता रहा। वह गौ-संरक्षण से जुड़े सवालों पर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखते रहे हैं।

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती भी गौ-संरक्षण के मुद्दे को लेकर लगातार मुखर रहे हैं। गाय को ‘राज्यमाता’ घोषित करने, गौ-वध और मांस निर्यात से जुड़े सवालों को लेकर शंकराचार्य की ओर से सरकार के सामने मांगें उठाई गई हैं।

सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल

राजनीतिक पारी शुरू करते ही नागेश्वर राव ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों को भी राजनीतिक बहस में लाने के संकेत दिए हैं।

अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव के आधार पर वह शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आजीविका, प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों को जनता के बीच ले जाने की बात कर रहे हैं।

उन्होंने यह आरोप भी लगाया है कि राजनीतिक लाभ के लिए सनातन समाज को जातियों और छोटे-छोटे सामाजिक समूहों में बांटने की कोशिश की जाती है। उनका कहना है कि उनकी पार्टी की राजनीति सामाजिक विभाजन के बजाय व्यापक सामाजिक एकता और जनकल्याण के मुद्दों पर केंद्रित होगी।

403 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान

एम. नागेश्वर राव ने उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का स्पष्ट ऐलान किया है।

नई पार्टी के लिए यह लक्ष्य अपने आप में बड़ी चुनौती है। 403 विधानसभा क्षेत्रों में संगठन खड़ा करना, स्थानीय नेतृत्व तैयार करना, उम्मीदवारों का चयन करना और बूथ स्तर तक कार्यकर्ता नेटवर्क तैयार करना लंबी राजनीतिक प्रक्रिया होगी।

फिलहाल पार्टी ने चुनावी लक्ष्य स्पष्ट कर दिया है। अब उसकी राजनीतिक सक्रियता का अगला चरण संगठन विस्तार और संभावित प्रत्याशियों की तलाश पर केंद्रित होगा।

प्रशासनिक अनुभव बनेगा राजनीतिक पहचान का आधार

नागेश्वर राव की राजनीति में सबसे अलग पहचान उनका करीब चार दशक लंबा प्रशासनिक अनुभव है। 1986 बैच के ओडिशा कैडर के IPS अधिकारी के रूप में उन्होंने पुलिस, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व संभाले। बाद में वह CBI से जुड़े और अंतरिम CBI निदेशक की जिम्मेदारी भी संभाली।

अब यही प्रशासनिक अनुभव उनकी राजनीतिक पहचान का प्रमुख आधार बनने जा रहा है।

उनकी कोशिश शासन और प्रशासन की अंदरूनी कार्यप्रणाली के अनुभव को राजनीतिक मुद्दों से जोड़कर जनता के सामने रखने की है। ऐसे में उनकी राजनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रशासनिक सुधार, जवाबदेही और शासन व्यवस्था से जुड़े सवालों पर केंद्रित हो सकता है।

यूपी के राजनीतिक गलियारों में चर्चा क्यों तेज?

नागेश्वर राव की एंट्री सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि वह पूर्व CBI निदेशक रहे हैं। महत्वपूर्ण यह भी है कि उन्होंने काशी से शुरुआत करते हुए सीधे पूरे उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों को अपना चुनावी क्षेत्र घोषित किया है।

एक ओर भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस जैसे स्थापित राजनीतिक दल हैं, जिनके पास वर्षों से संगठनात्मक ढांचा मौजूद है। दूसरी ओर नई राजनीतिक ताकतें अपने लिए जगह तलाश रही हैं।

ऐसे में सर्वजन सनातन पार्टी का प्रवेश यूपी के राजनीतिक विमर्श में एक और आवाज जोड़ता है।

भाजपा के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सनातन और सांस्कृतिक मुद्दों पर नई पार्टी अपनी राजनीतिक पहचान किस तरह बनाती है। वहीं सपा, बसपा और कांग्रेस जैसे दलों के लिए भी यह देखना अहम होगा कि नई पार्टी किन सामाजिक समूहों, मुद्दों और क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बनाने की कोशिश करती है।

हालांकि किसी नई पार्टी की वास्तविक चुनावी भूमिका का आकलन उसके संगठन, उम्मीदवारों, स्थानीय नेतृत्व और मतदाताओं के बीच स्वीकार्यता सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।

ब्यूरोक्रेसी से राजनीति तक-क्या बनेगा नया राजनीतिक विमर्श?

दिव्या मित्तल के बाद एम. नागेश्वर राव की राजनीतिक एंट्री ने इस सवाल को जरूर तेज कर दिया है कि प्रशासनिक सेवा में लंबा अनुभव रखने वाले अधिकारी अब सीधे राजनीति के जरिए शासन और सार्वजनिक नीति में अपनी भूमिका तलाश रहे हैं।

नागेश्वर राव का मॉडल इससे अलग है कि उन्होंने प्रशासनिक अनुभव के साथ सनातन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आजीविका को एक ही राजनीतिक मंच पर रखा है।

अब उनकी असली परीक्षा इस बात की होगी कि वह प्रशासनिक अनुभव और वैचारिक एजेंडे को कितनी तेजी से जमीनी संगठन में बदल पाते हैं।

काशी से शुरू हुआ सियासी अध्याय, नजर पूरे यूपी पर

पूर्व CBI निदेशक एम. नागेश्वर राव ने काशी की धरती से अपनी राजनीतिक पारी का ऐलान कर दिया है। पार्टी की कमान उनके हाथ में है, राजनीतिक एजेंडा सामने है और 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का लक्ष्य भी घोषित हो चुका है।

अब यूपी के राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की होगी कि पूर्व CBI निदेशक का प्रशासनिक अनुभव चुनावी राजनीति में किस रूप में सामने आता है और सर्वजन सनातन पार्टी अपने लिए कौन-सा राजनीतिक स्पेस तैयार करती है।

काशी से शुरू हुआ यह राजनीतिक अध्याय अब लखनऊ और प्रदेश के बाकी हिस्सों तक पहुंचने की तैयारी में है।

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