वाराणसी से पाकिस्तान को खुफिया जानकारी भेजने वाला तुफैल गिरफ्तार (फोटो- सोशल मीडिया) 
उत्तर प्रदेश

गजवा-ए-हिंद का सरगना तुफैल देश विरोध में झोंक रहा था पूरी ताकत, भारत की खुफिया जानकारी पाक भेजी; चढ़ा ATS के हत्थे

यूपी ATS ने जैतपुरा थाना क्षेत्र के दोषीपुरा निवासी मोहम्मद तुफैल को गुरुवार को आदमपुर क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह पाकिस्तान के व्हाट्स एप ग्रुप से जुड़कर भारत की खूफिया जानकारियां साझा कर रहा था।

सौरभ शर्मा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश एटीएस ने वाराणसी में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक युवक को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। जैतपुरा के दोषीपुरा इलाके का रहने वाला मोहम्मद तुफैल व्हाट्सएप के जरिए पाकिस्तान समर्थित राष्ट्रविरोधी संगठनों से जुड़ा था और संवेदनशील जानकारियां साझा कर रहा था। जांच में सामने आया कि तुफैल भारत की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाने की साजिशों में सक्रिय रूप से शामिल था। उसकी गतिविधियों का केंद्र गजवा-ए-हिंद और कट्टरपंथी विचारों का प्रचार-प्रसार करना था, जो देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता था।

तुफैल की गिरफ्तारी से एटीएस को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। वह पाकिस्तान के प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-लब्बैक से प्रभावित था और मौलाना शाद रिजवी जैसे कट्टर नेताओं के वीडियो साझा करता था। साथ ही वह बाबरी मस्जिद, शरीयत कानून और गजवा-ए-हिंद जैसे संवेदनशील मुद्दों को लेकर भारत विरोधी विचार फैला रहा था। वाराणसी के प्रमुख स्थलों की तस्वीरें व जानकारियां भी उसने पाकिस्तानी नंबरों पर भेजी थीं, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता था।

गजवा-ए-हिंद और ISI नेटवर्क से जुड़ा था तुफैल

यूपी एटीएस की जांच में सामने आया है कि तुफैल सिर्फ एक ग्रुप का हिस्सा नहीं था, बल्कि वह पाकिस्तान की आईएसआई के इशारों पर संचालित व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए गजवा-ए-हिंद जैसे अभियानों को बढ़ावा दे रहा था। उसने वाराणसी के कई युवाओं को भी इन ग्रुप्स से जोड़ने का प्रयास किया। तुफैल की गतिविधियां भारत की संप्रभुता के लिए सीधा खतरा बनती जा रही थीं, जिसे समय रहते काबू में लेना सुरक्षा एजेंसियों के लिए जरूरी हो गया था।

वाराणसी के संवेदनशील स्थलों की जानकारी पाकिस्तान को भेजी

तुफैल ने न केवल धार्मिक स्थलों की तस्वीरें खींचकर भेजीं बल्कि रेलवे स्टेशन, मस्जिदों और ऐतिहासिक स्थलों की सूचनाएं भी साझा की थीं। इनमें राजघाट, नमोघाट, ज्ञानवापी, जामा मस्जिद, लाल किला और निजामुद्दीन जैसे स्थल शामिल थे। ये सभी जानकारियां उसने पाकिस्तान के नंबरों पर ट्रांसफर कीं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह किसी सुनियोजित नेटवर्क का हिस्सा था। एटीएस ने उसका मोबाइल फोन, सिम और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त कर मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है।

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