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उत्तर प्रदेश

UP में 2027 की जगह 2026 में ही विधानसभा चुनाव! सियासी गलियारों में मचा हड़कंप, कब बजेगा चुनावी बिगुल?

UP Assembly Election 2027: यूपी में 2027 की जगह इसी साल नवंबर-दिसंबर में विधानसभा चुनाव होने की सुगबुगाहट तेज। जनगणना के चलते चुनाव आयोग समय से पहले मतदान कराने की संभावनाओं पर कर रहा है विचार।

अर्पित शुक्ला

Uttar Pradesh Chunav Update: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक नई सुगबुगाहट से सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव तय समय से पहले, यानी 2027 की जगह इसी साल नवंबर-दिसंबर में कराए जा सकते हैं।दरअसल यह सुगबुगाहट उस वक्त चर्चा में आई, जब राष्ट्रीय जनगणना विभाग ने चुनाव आयोग को सूचित किया है कि फरवरी और मार्च में देश भर में जनगणना का काम युद्धस्तर पर होना है, जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने भी मंजूरी दे दी है।

जनगणना देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायदों में से एक है। ऐसे में जनगणना विभाग ने चुनाव आयोग को पहले ही आगाह कर दिया है कि फरवरी-मार्च के दौरान उनकी पूरी मशीनरी जनगणना के काम में लगी रहेगी।

क्या कहता है चुनाव का नियम?

चुनाव आयोग के नियमों की बात करें तो किसी भी विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने के 6 महीने पहले किसी भी समय चुनाव कराए जा सकते हैं। चुनाव आयोग को इसके लिए संसद से किसी विशेष मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती है। यही कारण है कि फरवरी-मार्च के बजाय चुनाव को नवंबर-दिसंबर में खिसकाने की संभावना तलाशी जा रही है।

चुनाव आयोग ( सोर्स- सोशल मीडिया)

कब खत्म हो रहा है UP विधानसभा का कार्यकाल?

उत्तर प्रदेश की 18वीं विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 14 मई 2027 को खत्म हो रहा है। संवैधानिक नियमों के मुताबिक, इस तारीख से पहले चुनाव संपन्न कराने के साथ नई सरकार का गठन भी हो जाना अनिवार्य है। पहले ऐसा माना जा रहा था कि फरवरी-मार्च 2027 में विधानसभा चुनाव होंगे, लेकिन जनगणना के इस नए पेंच की वजह से अब साल 2026 के आखिरी महीनों में ही चुनाव कराने की प्लानिंग की जा रही है।

कड़ाके की ठंड भी है बाधा

अब तय समय से पहले अगर चुनाव आयोग जनवरी में चुनाव कराने की योजना बनाता है, तो उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे उत्तर भारत के राज्यों में कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और धुंध एक बड़ी समस्या बन सकते हैं। खराब मौसम की वजह से नेताओं के हेलीकॉप्टरों की लैंडिंग और उड़ान में समस्या आती है, जिससे चुनाव प्रचार प्रभावित होता है। वहीं, इसके उलट, नवंबर और दिसंबर का मौसम चुनाव प्रचार और मतदान के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। ऐसे में इसी साल के आखिरी में चुनाव की संभावना है।

सियासी दलों में मचा हड़कंप

केंद्र सरकार या चुनाव आयोग ने भले ही अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। सियासी दलों ने अपनी चुनावी गियर बदल दिए हैं। खबरों के मुताबिक, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी की बैठकों में नेताओं और कार्यकर्ताओं को सीधे हिदायत दी है कि सरकार समय से पहले चुनाव करवा सकती है, इसलिए जमीन पर तैयारी मजबूत रखें। सपा ने दावा किया है कि जनता इस बार बदलाव के लिए तैयार है।

अखिलेश यादव (सोर्स- सोशल मीडिया)

भाजपा के इंदर भी वक्त से पहले चुनाव को लेकर गहन मंथन किया जा रहा है। भाजपा को लगता है कि हालिया चुनावों के सकारात्मक मोमेंटम का फायदा उनको यूपी और उत्तराखंड में मिलेगा।

कांग्रेस और बसपा भी तैयारी में जुटी

सपा की सहयोगी पार्टी कांग्रेस ने भी संभावित उम्मीदवारों की तलाश और मंडलों में बैठकें शुरू कर दी हैं। वहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती भी लगातार संगठन की समीक्षा बैठकें कर प्रत्याशियों के चयन में जुट गई हैं। अगर राज्य में चुनाव समय से पहले होते हैं, तो यह केवल उत्तर प्रदेश नहीं, बल्कि उन सभी पांच राज्यों में होंगे जहां अगले साल चुनाव होने हैं।

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