सपा नेता शिवराज सिंह यादव (फोटो- सोशल मीडिया) 
उत्तर प्रदेश

'मैं हिंदू नहीं, यादव हूं', सपा नेता के बयान से सियासी बवाल, आखिर क्या है यदुवंशियों का असली इतिहास?

Samajwadi Party के नेता द्वारा दिए गए यादव के हिंदू न होने वाले बयान पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है, सपा नेता शिवराज सिंह ने मनुस्मृति का विरोध कर जाति व्यवस्था पर कई सवाल उठाए।

सौरभ शर्मा

SP leader controversy: उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बयानों का बवंडर उठ खड़ा हुआ है। सिरसागंज के गांव डांडियामई में आयोजित समाजवादी पार्टी की पीडीए पाठशाला में एक ऐसा बयान सामने आया है, जिसने सबको चौंका दिया है। सपा जिलाध्यक्ष शिवराज सिंह यादव ने खुले मंच से कह दिया कि हम हिंदू नहीं, बल्कि यादव हैं। उनके इस बयान ने न केवल राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है, बल्कि एक नई बहस को भी जन्म दे दिया है।

जिलाध्यक्ष का गुस्सा यहीं नहीं थमा। उन्होंने मनुस्मृति और जाति व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह उस धर्म को नहीं मानते जो इंसान को कुत्ते से भी नीचे समझता है। उनका कहना था कि देश की नब्बे प्रतिशत आबादी होने के बाद भी दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक सत्ता से दूर हैं। उनका आरोप था कि मौजूदा सरकार में इन वर्गों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हो रहे हैं, जबकि एक सीमित वर्ग व्यवस्था पर काबिज होकर मलाई काट रहा है।

सियासी गलियारों में आया भूचाल

शिवराज सिंह यादव के इस बयान के बाद राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ गया है। भाजपा हमेशा ऐसे भावनात्मक और धार्मिक मुद्दों पर आक्रामक रही है और माना जा रहा है कि वह इस बयान को लेकर सपा को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक को लेकर सपा अपनी रणनीति धारदार बना रही है। लेकिन हिंदू धर्म से खुद को अलग बताने वाला यह दांव पार्टी के लिए नई मुसीबत खड़ी कर सकता है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह महज एक राजनीतिक स्टंट है या फिर वोट बैंक साधने की कोई नई जुगत, जिसने धर्म और पहचान के मुद्दे को हवा दे दी है।

आखिर क्या है यदुवंशियों का सच?

इस विवाद के बीच यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर इतिहास और धर्म क्या कहता है। यादव समुदाय भारत के सबसे प्राचीन समुदायों में से एक है जो खुद को राजा ययाति के पुत्र यदु का वंशज मानता है। इसीलिए इन्हें यदुवंशी कहा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण भी इसी कुल से थे और उन्हें यदुवंशी क्षत्रिय माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से यादव वैष्णव परंपरा का पालन करते हैं और उनके जन्म से लेकर विवाह तक के सारे संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार ही होते हैं। ऐतिहासिक रूप से अहीर या ग्वाला कहे जाने वाले इस समुदाय को आज ओबीसी में रखा गया है, लेकिन इसका आधार सामाजिक है न कि धार्मिक। ऐसे में खुद को हिंदू धर्म से अलग बताना ऐतिहासिक तथ्यों से मेल नहीं खाता है।

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