बीजेपी छोड़कर सपा में शामिल हुए सिनोद शाक्य का नाम यूपी बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की सूची में शामिल है।
बीजेपी की 548 सदस्यों की सूची में सिनोद शाक्य का नाम 88वें नंबर पर दर्ज है।
सिनोद शाक्य ने पहले भी सपा और बीजेपी के बीच पाला बदला है। 2027 के चुनाव से पहले उनकी वापसी चर्चा में है।
UP BJP state executive committee list: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दल-बदल की राजनीति के बीच एक दिलचस्प मामला सामने आया है। बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए सिनोद शाक्य का नाम यूपी बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्यों की सूची में शामिल है। बीजेपी ने सोमवार शाम 548 सदस्यों की सूची जारी की, जिसमें बदायूं के सिनोद शाक्य का नाम 88वें नंबर पर है।
दिलचस्प बात यह है कि सिनोद शाक्य सोमवार सुबह ही बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली। इसके कुछ घंटे बाद जारी बीजेपी की सूची में उनका नाम आने से राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है।
सिनोद शाक्य की सपा में वापसी के पीछे भी एक दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम है। वह 2007 और 2012 में बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के टिकट पर बदायूं की दातागंज विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
2022 के विधानसभा चुनाव से पहले सिनोद शाक्य समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें विधानसभा का टिकट नहीं दिया। बाद में सपा ने उन्हें विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया।
सिनोद शाक्य ने सपा के टिकट पर एमएलसी चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था। हालांकि, नाम वापसी के अंतिम दिन उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद बीजेपी के उम्मीदवार के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया।
इस घटनाक्रम से सपा को राजनीतिक नुकसान हुआ और सिनोद शाक्य की भूमिका पर सवाल उठे। इसके बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था।
अब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सिनोद शाक्य ने एक बार फिर पाला बदल लिया है। बीजेपी छोड़कर सपा में उनकी वापसी ऐसे समय हुई है, जब दोनों दल चुनावी तैयारियों में जुटे हैं।
सुबह सपा में शामिल होने और शाम को बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की सूची में नाम आने के घटनाक्रम ने इस मामले को और चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि बीजेपी इस सूची में सुधार करती है या इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी करती है।