सीएम योगी और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। 
उत्तर प्रदेश

'ब्रजेश पाठक का कदम योगी के गाल पर तमाचा': शिखा विवाद पर भड़के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

UP Political News: प्रयागराज के माघ मेले में बटुकों की शिखा खींचने का विवाद थम नहीं रहा। यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 101 बटुकों का सम्मान किया है। इसे लेकर अब अविमुक्तेश्वरानंद ने तंस कसा है।

रंजन कुमार

Swami Avimukteshwaranand On Yogi Adityanath: प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन पुलिसकर्मियों द्वारा वेदपाठी बटुकों की शिखा (चोटी) खींचने का मामला अब उत्तर प्रदेश की सियासत में धर्मयुद्ध का रूप ले चुका है। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस पूरे प्रकरण पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के बीच के समीकरणों पर तीखा हमला बोला है।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने हाल ही में अपने आवास पर 101 बटुकों का सम्मान कर प्रयागराज की घटना को पाप बताया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि ब्रजेश पाठक का यह कदम सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गाल पर तमाचा है। उन्होंने तर्क दिया कि जब सरकार का एक बड़ा हिस्सा (डिप्टी सीएम) यह स्वीकार कर रहा है कि पुलिस की कार्रवाई गलत थी तो यह साबित होता है कि मुख्यमंत्री ने गलत रास्ता चुना है। शंकराचार्य ने तंज कसते हुए कहा कि यूपी के दोनों डिप्टी सीएम के पास कोई वास्तविक पावर नहीं है, उन्हें सिर्फ नाम के लिए रखा गया है। उन्होंने सवाल उठाया, क्या बटुकों को मारकर उन पर फूल चढ़ाने से शांति मिल जाएगी? जिन बटुकों का अपमान हुआ, क्या डिप्टी सीएम उनका नाम भी जानते हैं?

मर्यादा और गेरुआ वस्त्र पर सवाल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सदन में दिए गए मर्यादा वाले बयान पर पलटवार करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि बड़े पद पर बैठने से किसी को अन्याय करने का लाइसेंस नहीं मिल जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि गेरुआ वस्त्र धारण करने के बावजूद शासन में सनातन धर्म के प्रतीकों और शिखा का अपमान किया जा रहा है और मुख्यमंत्री सदन में खड़े होकर असत्य बोल रहे हैं।

विपक्ष की एंट्री और 11 मार्च का अल्टीमेटम

इस विवाद में अब समाजवादी पार्टी भी कूद पड़ी है। अखिलेश यादव और शिवपाल यादव ने शंकराचार्य के समर्थन में बयान दिए हैं, जिस पर स्वामी जी ने कहा कि सपा बोल सकती है तो बीजेपी के नेताओं को बोलने से किसने रोका है? शंकराचार्य ने साफ कर दिया है कि वे केवल प्रतीकात्मक सम्मान से मानने वाले नहीं हैं। उन्होंने इसे सनातन धर्म के ध्वज पर प्रहार बताया और न्याय की मांग को लेकर 11 मार्च को लखनऊ कूच करने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि यदि दोनों डिप्टी सीएम को वास्तव में अपनी गलती का एहसास है तो उन्हें बनारस आकर माफी मांगनी चाहिए।

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