ट्रेन (सोर्स- सोशल मीडिया)
उत्तर प्रदेश

बार-बार सिग्नल फेल पर रेलवे सख्त; हर खराबी की होगी वैज्ञानिक जांच, उपकरण कंपनियों की भी तय होगी जवाबदेही

Railway News: रेलवे में बार-बार सिग्नल फेल होने की घटनाओं पर तकनीकी टीम जांच करेगी। खराबी के मूल कारणों की पड़ताल के बाद सिग्नल उपकरणों की गुणवत्ता और निर्माता कंपनियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

ओमप्रकाश सिंह परिहार, स्निग्धा श्रीवास्तव

Action Railway Signal Failure: ट्रेनों के सुरक्षित और समयबद्ध संचालन के लिए रेलवे बोर्ड ने सिग्नल एवं दूरसंचार प्रणाली को लेकर अहम कदम उठाया है। अब देश के सभी रेल मंडलों में अनुभवी तकनीकी कर्मचारियों की एक समर्पित विशेष टीम गठित की जाएगी। यह टीम सिग्नल व टेलीकॉम से जुड़ी गंभीर और बार-बार होने वाली खराबियों का वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण करेगी और उनके स्थायी समाधान के लिए तकनीकी सुधार सुझाएगी।

रेलवे में सिग्नल या ट्रैक सर्किट में खराबी आने पर स्थानीय स्तर पर मेंटेनेंस कर्मचारी तत्काल मौके पर पहुंचकर खामी दूर करते हैं। इसके बाद ट्रेनें आगे रवाना हो जाती हैं। हालांकि, अब केवल तत्काल खराबी दूर करने के बजाय उसके मूल कारण का पता लगाने पर जोर दिया जाएगा। विशेष टीम खराबी के कारणों की गहन वैज्ञानिक जांच करेगी। इसके साथ ही सिग्नल उपकरणों का नियमित क्वालिटी ऑडिट भी कराया जाएगा।

उपकरण निर्माता कंपनियां भी होंगी जवाबदेह

विशेष टीम की विस्तृत सिफारिशों के आधार पर रेलवे की सिग्नल एवं दूरसंचार व्यवस्था में स्थायी नीतिगत और तकनीकी सुधार किए जाएंगे। नए प्रोजेक्ट में इस्तेमाल होने वाले सिग्नल उपकरणों की गुणवत्ता की भी निगरानी होगी। उपकरण निर्माता कंपनियों को भी व्यवस्था की कमियों और बार-बार सामने आने वाली खराबियों के लिए जवाबदेह बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

रेलवे बोर्ड के मुताबिक, देशभर में हर वर्ष सिग्नल फेल होने के 50 हजार से अधिक मामले सामने आते हैं। इनमें सामान्य सिग्नल और प्वाइंट फेल होने की घटनाएं भी शामिल हैं। देश के 68 से अधिक मंडलों में ऐसे करीब 50-55 हजार छोटे-बड़े मामले सामने आने की बात कही गई है।

दक्षिण पश्चिम रेलवे में सालाना 2,961 सिग्नल फेल

अकेले दक्षिण पश्चिम रेलवे जोन के हुबली, बेंगलुरु और मैसूर मंडल में प्रतिवर्ष औसतन 2,961 सिग्नल फेल की घटनाएं दर्ज की गई हैं। हालांकि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग समेत सिग्नल प्रणाली के आधुनिकीकरण के बाद पूरे भारतीय रेल नेटवर्क में सिग्नल विफलताओं में करीब 58 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2014-15 में लगभग 1.30 लाख मामले सामने आए थे।

रेलवे के सबसे व्यस्त दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-मुंबई रूट के बड़े हिस्से को संभालने वाले उत्तर मध्य रेलवे को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है। रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (सिग्नल) बीएम त्रिपाठी के अनुसार, सभी विफलताओं की शत-प्रतिशत ऑनलाइन मॉनिटरिंग और डीआरएम स्तर पर जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लेटलतीफी कम हो और यात्रियों का सफर सुरक्षित रहे।

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