भारतीय रेलवे (सोर्स- सोशल मीडिया) 
प्रयागराज

रेलवे कर्मचारियों को बड़ी राहत, मेडिकल आधार पर कैडर बदलने वालों की पुरानी सेवा भी प्रमोशन में होगी शामिल

News For Railway Employees: रेलवे बोर्ड ने मेडिकल आधार पर कैडर बदलने वाले कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। अब उनकी पुरानी यूनिट में दी गई सेवा भी विभागीय परीक्षा और प्रमोशन की पात्रता में जोड़ी जाएगी।

स्निग्धा श्रीवास्तव

Promotion Rules For Railway Employees: भारतीय रेलवे ने मेडिकल आधार पर मूल कैडर छोड़कर वैकल्पिक पदों पर भेजे गए हजारों रेल कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि ऐसे कर्मचारियों की पुरानी यूनिट में दी गई सेवा को भी विभागीय परीक्षा और पदोन्नति (प्रमोशन) की पात्रता के लिए जोड़ा जाएगा। इससे लंबे समय से प्रमोशन में आ रही तकनीकी बाधाएं समाप्त होंगी और कर्मचारियों को उनके अनुभव का पूरा लाभ मिल सकेगा।

चिकित्सकीय रूप से अयोग्य घोषित किए जाते है कर्मचारी

रेलवे में सेवा के दौरान कई कर्मचारी स्वास्थ्य संबंधी कारणों से अपनी मूल श्रेणी में कार्य करने के लिए चिकित्सकीय रूप से अयोग्य घोषित कर दिए जाते हैं। ऐसे मामलों में नियमों के तहत उन्हें किसी अन्य विभाग या वैकल्पिक पद, जैसे मिनिस्ट्रियल कैडर अथवा ऑफिस स्टाफ में समायोजित किया जाता है। अब तक यह स्पष्ट नहीं था कि नई यूनिट में आने के बाद उनकी पूर्व सेवा को विभागीय प्रतियोगी परीक्षाओं और सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा (एलडीसीई) के लिए पात्रता में शामिल किया जाएगा या नहीं।

भारतीय रेलवे ने जारी किया आदेश

देशभर के विभिन्न जोनल रेलवे से इस संबंध में लगातार स्पष्टीकरण मांगा जा रहा था। स्पष्ट नियमों के अभाव में कई कर्मचारियों के प्रमोशन पर असर पड़ रहा था और उन्हें विभागीय परीक्षाओं में शामिल होने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

रेलवे बोर्ड ने अब आदेश जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी कर्मचारी को मेडिकल डी-कैटेगराइजेशन के कारण मूल पद से हटाकर वैकल्पिक पद पर नियुक्त किया गया है, तो मेडिकल आधार पर अयोग्य घोषित होने से पहले मूल यूनिट में दी गई उसकी सेवा को नई यूनिट की सेवा के साथ जोड़ा जाएगा। इस संयुक्त सेवा अवधि के आधार पर कर्मचारी एलडीसीई सहित सभी विभागीय परीक्षाओं में बैठने के पात्र होंगे और पदोन्नति का लाभ भी प्राप्त कर सकेंगे।

उप निदेशक (स्थापना) संजय कुमार द्वारा जारी निर्देश के अनुसार यह व्यवस्था सभी जोनल रेलवे कार्यालयों और उत्पादन इकाइयों में लागू होगी। रेलवे के इस फैसले से मेडिकल आधार पर कैडर बदलने वाले हजारों कर्मचारियों को राहत मिलेगी और उनके करियर की प्रगति अब पूर्व सेवा के अनुभव के अनुरूप आगे बढ़ सकेगी।

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