Prayagraj Makduma Hill Land Of Peacocks: प्रयागराज के बारा तहसील क्षेत्र के असवा गांव के पास स्थित मकदुमा पहाड़ी पर खनन गतिविधियां शुरू होने से क्षेत्र के पर्यावरण और वन्य जीवों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। पहाड़ी पर बुधवार से बड़े पैमाने पर मशीनों के जरिए खनन कार्य शुरू किया गया, जिससे आसपास के ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों में चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों के अनुसार मकदुमा पहाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में राष्ट्रीय पक्षी मोर सहित तमाम अन्य वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास है।
मोरों की मौजूदगी के कारण यह क्षेत्र अपनी अलग पहचान रखता है। खनन के लिए पोकलेन और जेसीबी जैसी भारी मशीनें उतारे जाने से वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास, पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
लगभग 300 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली इस पहाड़ी पर खनन शुरू होने के बाद ग्रामीणों ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि यह केवल खनन क्षेत्र नहीं है, बल्कि प्रकृति और वन्य जीवों के संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थान है। मशीनों की आवाज और लगातार खुदाई से वन्य जीवों के प्रभावित होने का खतरा है।
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भारतीय किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष ऋषि पांडेय ने इस मामले को लेकर तहसीलदार बारा को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने राष्ट्रीय पक्षी मोर और अन्य वन्य जीवों के संरक्षण की मांग करते हुए खनन गतिविधियों की जांच कराने की मांग की है।
वहीं ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को खनन शुरू करने से पहले पर्यावरणीय प्रभावों की जांच करनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि प्राकृतिक क्षेत्र में बिना उचित अध्ययन के खनन होने से जैव विविधता को नुकसान पहुंच सकता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए और वन्य जीवों तथा पर्यावरण की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन ऐसे विकास से बचना चाहिए जिससे प्रकृति और स्थानीय लोगों को नुकसान पहुंचे।