भारतीय रेलवे-टीटीई (सांकेतिक फोटो) 
प्रयागराज

भारतीय रेलवे की नई पहल: टिकट जांच के दौरान बॉडी वॉर्न कैमरा पहनेंगे टीटीई, विवादों और शिकायतों पर लगेगी लगाम

Indian Railway News: भारतीय रेलवे टिकट जांच प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए TTE को बॉडी वॉर्न कैमरे से लैस कर रहा है इस प्रोजेक्ट की शुरुआत प्रयागराज एक्सप्रेस और श्रमशक्ति एक्सप्रेस से होगी।

स्निग्धा श्रीवास्तव

Indian Railway TTE Body Worn Camera: भारतीय रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और टिकट जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। अब ट्रेनों में तैनात टिकट जांच कर्मचारी (टीटीई) ड्यूटी के दौरान बॉडी वॉर्न कैमरा पहनकर टिकटों की जांच करेंगे। रेलवे का मानना है कि इस व्यवस्था से यात्रियों और टीटीई के बीच होने वाले विवाद, गलतफहमियां और शिकायतें काफी हद तक कम हो सकेंगी।

टिकट जांच की प्रक्रिया के दौरान सक्रिय हो जाएगा कैमरा

रेलवे अधिकारियों के अनुसार बॉडी वॉर्न कैमरा एक छोटा और अत्याधुनिक उपकरण है, जिसे टीटीई अपनी वर्दी पर सीने के पास लगाएंगे। जैसे ही टिकट जांच की प्रक्रिया शुरू होगी, कैमरा सक्रिय हो जाएगा और जांच के दौरान होने वाली बातचीत, गतिविधियों तथा घटनाक्रम की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग करता रहेगा। इससे किसी भी विवाद या शिकायत की स्थिति में वास्तविक तथ्यों की जांच करना आसान हो जाएगा।

प्रयागराज एक्सप्रेस और श्रमशक्ति एक्सप्रेस से होगी शुरूआत

रेलवे ने इस नई व्यवस्था को फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने का फैसला किया है। इसकी शुरुआत प्रयागराज और दिल्ली के बीच चलने वाली प्रयागराज एक्सप्रेस तथा कानपुर-दिल्ली मार्ग की श्रमशक्ति एक्सप्रेस में की जाएगी। इन ट्रेनों में टीटीई बॉडी कैमरों के साथ टिकट जांच करेंगे और परियोजना के परिणामों का मूल्यांकन किया जाएगा।

कैमरों के संचालन और उपयोग के लिए दी जा रही विशेष ट्रेनिंग

उत्तर मध्य रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक इस परियोजना के लिए करीब 130 बॉडी कैमरे खरीदे जा चुके हैं। संबंधित कर्मचारियों को कैमरों के संचालन और उपयोग की विशेष ट्रेनिंग भी दी जा रही है। रेलवे का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तकनीक का उपयोग यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा दोनों को मजबूत करने के लिए किया जाए।

अनावश्यक विवादों पर लगेगी लगाम

रेलवे का मानना है कि बॉडी कैमरों से न केवल टिकट जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी, बल्कि कर्मचारियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी। रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने से शिकायतों के निस्तारण में तेजी आएगी और झूठे आरोपों या अनावश्यक विवादों की संभावना कम होगी।

यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो आने वाले समय में इसे उत्तर मध्य रेलवे के अन्य मंडलों और ट्रेनों में भी लागू किया जाएगा। रेलवे के इस कदम को यात्रियों के हित में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जो तकनीक के माध्यम से रेल सेवाओं को और अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में उठाया गया है।

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